देवरिया, सितंबर 17 -- उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले सदर विकास खण्ड के बढ़या बुजुर्ग गांव में रोजमर्रा के उत्पादों पर होने वाला करोड़ों रुपये का खर्च यदि स्थानीय स्तर पर रोका जाए तो गांव आत्मनिर्भर बन सकता है। गुरुवार को आयोजित 'संवाद-अभाव से अवसर की ओर' कार्यशाला में ग्रामीणों ने इस दिशा में मंथन किया।

जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल व नेचर सोल फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में बताया गया कि सर्वे के अनुसार बढ़या बुजुर्ग गांव से हर साल करीब 56.68 करोड़ रुपये विभिन्न उत्पादों की खरीद में बाहर जा रहा है। कार्यशाला के फैसिलिटेटर व सोशल फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर सचिन गोरे ने ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा के 60 उत्पाद रखे। ग्रामीणों ने उनमें से सरसों तेल, सूजी, मैदा, नमकीन, डिटर्जेंट समेत 24 उत्पादों को गांव में ही तैयार किये जाने योग्य माना।

कार्यशाला में जागृति के उद्यम कोर मार्कंडेय दयाल त्रिपाठी ने सर्वे के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि किसान से 10 रुपये किलो खरीदा गया आलू बाहर का कारोबारी चिप्स बनाकर 200 से 300 रुपये किलो में बेचता है। ऐसे में ग्रामीण स्वयं मूल्यवर्धन कर उद्यम खड़ा कर सकते हैं। जागृति बायोरिजनल सीओई के ऑपरेशंस मैनेजर आनंद सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला एक दिन की गतिविधि नहीं है। संस्था एक साल तक ग्रामीणों के साथ काम कर उद्यम संभावनाओं को मूर्त रूप देने में मदद करेगी।कार्यशाला में नेचरसोल फाउंडेशन के संस्थापक विजय मणि, जागृति के ऑपरेशंस एसोसिएट मनोज तिवारी, राहुल रंजन, कंसल्टेंट हंसिका सिंह और सोक्रेट्स संस्था के रोहित समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।

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