देवरिया, फरवरी 21 -- कभी चीनी का कटोरा कहे जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सरकारी तंत्र की उपेक्षा के चलते पांच चीनी मिलों में मात्र एक एशिया की सबसे पुरानी चीनी मिल अस्तित्व में है।

आज यहां पांच चीनी मिलों में से मात्र एक प्रतापपुर की चीनी मिल चल रही है। कभी देवरिया जिले में देवरिया में गौरीबाजार, बैतालपुर, देवरिया सदर, भटनी और प्रतापपुर पांच चीनी मिल चला करती थी, लेकिन यहां की चार चीनी मिलें देवरिया सदर, बैतालपुर, गौरी बाजार और भटनी की चीनी मिलें सरकारों की उपेक्षा के कारण वर्षों पूर्व बंद हो गई। इन चीनी मिलों के बंद हो जाने के कारण जहां उसमें कार्यरत कर्मचारी बदहाल हो गये। वहीं गन्ना किसान भी इस जिले में गन्ने की खेती करने से परहेज करने लगे। यहां के किसान गन्ने की खेती कर खुशहाल महसूस करते थे। लेकिन चीनी मिलों के बंद हो जाने के कारण अब वे गन्ना बोने से परहेज करते दिख रहे हैं।

यहां के गन्ना किसानों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में चाहें जो भी दल सत्ता में आयीं। लेकिन किसी ने भी गन्ना किसानों की चिन्ता नहीं की और किसी ने भी बंद चीनी मिलों को चलवाने के प्रति ध्यान नही दिया। वहीं किसानों का कहना है कि चुनाव के दौरान तो सभी सियासी दलें किसानों को सपना दिखा कर अपनी रणनीतिक रोटियां सेक लेतें हैं। जिससे यहां का गन्ना किसान अपने को ठगा महसूस करते हैं। देवरिया जिले में चीनी मिल छोड़ दिया जाय तो यहाँ कोई विशेष उद्योग धंधा नही है जहां यहां के बेरोजगार रोजगार की तलाश कर सकें। घाटे और अन्य कारणों से भटनी गौरी बाजार, देवरिया और बैतालपुर चीनी मिले बंद कर दी गई।

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