देवरिया , अक्टूबर 18 -- उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले की पथरदेवा विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भले ही छोटा हो लेकिन सियासी अहमियत बड़ी है। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई यह सामान्य सीट देवरिया लोकसभा के अंतर्गत आती है। इससे पहले इसका अधिकांश हिस्सा कसया और गौरी बाजार विधानसभा में शामिल था। 2012 में यहां पहली बार चुनाव हुआ।
पहले चुनाव 2012 में समाजवादी पार्टी (सपा) के शाकिर अली ने भाजपा के दिग्गज सूर्य प्रताप शाही को 4,554 वोटों से हराकर इतिहास रचा था। लेकिन 2017 की मोदी लहर में तस्वीर बदल गई। शाही ने 42,997 वोटों के बड़े अंतर से शाकिर अली को हराकर न सिर्फ बदला लिया।बल्कि इस सीट पर भाजपा का कब्जा कराया। 2022 में भाजपा ने फिर शाही पर भरोसा जताया। जबकि सपा ने पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को उतारा। इस बार भी शाही ने 93,858 वोट पाकर 28,681 वोटों से लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
वर्तमान में पथरदेवा के विधायक सूर्य प्रताप शाही योगी सरकार में कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री हैं। मंत्री का गृह क्षेत्र होने से इसे वीआईपी सीट का दर्जा मिला है। कृषि मंत्री के क्षेत्र होने से यहां कृषि आधारित योजनाओं, सड़कों और चीनी मिल से जुड़े विकास कार्यों को गति मिली है। कुल मिलाकर पथरदेवा अब पूर्वांचल की उन सीटों में गिनी जाती है। जहां विकास और विरासत दोनों की राजनीति साथ-साथ चलती है।
मंत्री की सीट होने से यहां विकास कार्यों को गति मिली है, हालांकि रोजगार और अन्य चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। सकारात्मक पक्ष की बात करें तो कृषि मंत्री का क्षेत्र होने के कारण यहां किसानों को आधुनिक बीज वितरण केंद्र, कृषि जागरूकता कार्यक्रम और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सड़क और बुनियादी ढांचे में भी सुधार हुआ है। जिले को मिली करीब 305 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा पथरदेवा को प्राप्त हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के रोस्टर में भी पहले की तुलना में सुधार देखा गया है।
वहीं चुनौतियों में सबसे बड़ी समस्या रोजगार की कमी है। क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग न होने से स्थानीय युवाओं में बेरोजगारी और पलायन की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा निचले इलाकों में बारिश के मौसम में जलजमाव और छोटी नदियों के उफान से फसलों को नुकसान होता है। गन्ना किसानों के समय पर भुगतान का मुद्दा भी बीच-बीच में चर्चा में रहता है।
जातीय समीकरण की दृष्टि से पथरदेवा में कुल लगभग 3.38 लाख मतदाता हैं। यहां मुस्लिम मतदाता करीब 19 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ सबसे निर्णायक भूमिका में हैं। इसके अलावा यादव और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी अच्छी-खासी है, जो हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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