जयपुर , मार्च 23 -- राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसद में पश्चिम एशिया के युद्ध हालातों पर दिए गए संबोधन पर तंज कसते हुए कहा कि देर से आए लेकिन दुरुस्त नहीं आये।
श्री जूली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ऐसी कोई नई जानकारी साझा नहीं की जो पहले से सार्वजनिक नहीं थी और न ही उनके संबोधन से देश की जनता को एलपीजी की सुचारू आपूर्ति को लेकर कोई ठोस आश्वासन मिला है और सिर्फ देशवासियों की चिंता को ही बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की ढुलमुल नीतियों का दुष्परिणाम आज देश भुगत रहा है, जिस सरकार के लिए देशवासी प्राथमिकता होने चाहिए थे वो अपनी नीतियों से आमजन को बड़े ऊर्जा संकट की तरफ धकेल रही है।
उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि चाहे नोटबंदी की आपदा हो या कोरोना जैसी विभीषिका, देश की जनता को मोदी सरकार की संवेदनशीलता पर भरोसा था लेकिन हर बार उनके हाथ केवल निराशा ही लगी है।
श्री जूली ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से लेकर कोरोना संकट तक हर बार सरकार को समय रहते आगाह किया था लेकिन अहंकार में डूबी मोदी सरकार ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया जबकि वक्त ने हर बार श्री गांधी की बातों को सही साबित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि एलपीजी संकट से प्रभावित होने वाले फैक्ट्री मजदूरों, किसानों और गरीबों को राहत देने के लिए उनके पास क्या योजना है।
श्री जूली ने पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण संघर्षों में राजस्थान के युवाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खाड़ी युद्ध में राजस्थान के सपूतों की भी जान गई है।
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