लंदन , सितंबर 04 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने दूसरे देशों के साथ रिश्तों के विस्तार में कूटनीतिक और राजनीतिक संपर्क के साथ साथ आम जन के स्तर पर संवाद-सम्पर्क को महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि संघ इसमें सहयोग के लिए तैयार है और इस पर आधारित सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन के तौर पर संघ इस मामले में वैश्विक स्तर पर अहम भूमिका निभा सकता है।

श्री आंबेकर ने कहा कि दो देशों के बीच संबंधों की प्रगाढ़ता के लिए उनके लोगों के बीच संवाद और सम्पर्क जरूरी होता है। इससे सभ्यतागत और संस्कृति संबंधों को शक्ति मिलती है। वह यहां आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। श्री भागवत अमेरिका और कनाडा की यात्रा के बाद दो सितंबर से ब्रिटेन में हैं और सात सितंबर तक यहां रहेंगे। ब्रिटेन का उनका यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर हो रहा है।

उन्होंने बताया कि श्री भागवत यहां लोगों से यानी सार्वजनिक जीवन से जुड़े अहम लोगों से मिलेंगे। वह अलग-अलग संगठनों से भी बातचीत करेंगे। वह विल्सडेन में श्री स्वामीनारायण मंदिर का दर्शन कर चुके हैं। संघ के प्रवक्ता ने कहा कि श्री भागवत के ब्रिटेन के दौरे से भारत और ब्रिटेन के लोगों के बीच संपर्क , सहयोग और सांस्कृतिक रिश्ते मज़बूत होंगे।

श्री आंबेकर ने कहा कि पश्चिमी जगत के अकादमिक क्षेत्र में हिंदुत्व की धारणा को लेकर भ्रांतियां हैं जिन्हें हटाने की जरूरत है। भारत कोई 'नेशन-स्टेट' (राष्ट्र-राज्य) जैसी राजनीतिक अवधारणा नहीं है बल्कि एक सांस्कृतिक अवधारणा है। हिंदुत्व किसी अन्य पंथिक धर्म जैसा नहीं है। उन्होंने कहा, " हिंदुत्व यह कोई तय या सीमित अवधारणा नहीं है। यह एक ऐसी अवधारणा है जिसमें किसी भी तरह के धर्म या सभी धार्मिक रीति-रिवाजों की सच्चाई के प्रति सम्मान और विश्वास होता है। यही हिंदुत्व है, यही भारत है।"उन्होंने कहा, " मुझे लगता है कि (संघ प्रमुख का) यह दौरा इन विचारों को स्पष्ट करने में मदद करेगा।" उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि सरकार के स्तर पर होने वाली कूटनीतिक बातचीत के अलावा लोगों के बीच बातचीत की भी ज़रूरत है। बड़े पैमाने पर सभ्यता और संस्कृति से जुड़े रिश्तों की ज़रूरत है, और संस्कृति तथा सभ्यता पर आधारित सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन के तौर पर आरएसएस निश्चित रूप से विश्व स्तर पर अहम भूमिका निभा सकता है। यह दौरा 'इंटीग्रल' संगठन के निमंत्रण पर हो रहा है।"उल्लेखनीय है कि श्री भागवत संघ के सहस्त्राब्दी वर्ष के मौके पर तीन देशों के दौरे के आखिरी चरण में गुरुवार को लंदन पहुंचे हैं। इससे पहले वह अमेरिका और कनाडा का दौरा कर चुके हैं।

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