हैदराबाद , अगस्त 22 -- तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने दूरसंचार, प्रसारण, हवाई अड्डों के शुल्क और साइबर मामलों से जुड़े विवादों को जल्दी और विशेषज्ञ तरीके से सुलझाने के लिए विशेष व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया है।
न्यायमूर्ति सिंह ने हवाई अड्डा शुल्क, दूरसंचार, प्रसारण और साइबर क्षेत्रों में विवादों के समाधान की व्यवस्था विषय पर यहां आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि इन क्षेत्रों में नियमों और तकनीकी मामलों से जुड़े विवाद काफी जटिल होते हैं। इसलिए इन्हें सुलझाने के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं और न्यायिक व्यवस्था का होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि दूरसंचार क्षेत्र में निजी कंपनियों के आने और इस क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलने के बाद नयी नियामक और विवाद निपटाने की व्यवस्था की जरूरत महसूस हुई। इसी के तहत 1997 में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) और 2000 में दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) की स्थापना हुई थी।
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि बाद में टीडीएसएटी का अधिकार क्षेत्र बढ़ाकर प्रसारण, केबल सेवाओं और हवाई अड्डों के शुल्क से जुड़े मामलों को भी इसमें शामिल किया गया। उन्होंने नियामक संस्थाओं की स्वतंत्रता, विशेषज्ञता और न्यायिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई से नियामक व्यवस्था के उद्देश्यों को नुकसान पहुंच सकता है और उद्योग तथा उपभोक्ताओं के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
उच्चतम न्यायालय के एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ के फैसले का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि न्यायाधिकरण न्याय व्यवस्था के पूरक के रूप में काम करते हैं, लेकिन उनके फैसले संविधान के तहत होने वाली न्यायिक जांच के अधीन रहते हैं।
हवाई अड्डों के आर्थिक नियमन के बारे में उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे एक जटिल आर्थिक व्यवस्था हैं, जिसमें कई पक्ष और एक-दूसरे से जुड़ी हुई सेवाएं शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि इनसे जुड़े शुल्क विवादों को सुलझाने में टीडीएसएटी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
दूरसंचार और प्रसारण के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने लाइसेंस, स्पेक्ट्रम, इंटरकनेक्शन, सेवा की गुणवत्ता, सिग्नल तक पहुंच और कीमत तय करने से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी नियमन में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के साथ-साथ उचित प्रतिस्पर्धा और कारोबार के लिए स्थिर माहौल को बढ़ावा देना चाहिए।
उन्होंने साइबर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सामने आ रही नयी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि तकनीक के तेजी से विकास के कारण साइबर विवाद, धोखाधड़ी और जवाबदेही से जुड़े सवाल और अधिक जटिल हो गये हैं। तकनीक और एआई न्यायिक प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे न्यायिक सोच-विचार, जवाबदेही और मानवीय निगरानी की जगह नहीं ले सकते।
न्यायमूर्ति सिंह ने विशेष प्रकार के विवादों में मध्यस्थता और आपसी सहमति से विवाद सुलझाने पर भी जोर दिया। उन्होंने विशेषज्ञ न्याय व्यवस्था तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने के लिए न्यायाधिकरण की अधिक पीठें उपलब्ध कराने का समर्थन किया।
इस मौके पर टीडीएसएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डी. एन. पटेल ने दूरसंचार, प्रसारण, हवाई अड्डा शुल्क और साइबर क्षेत्रों में विशेष और समयबद्ध तरीके से विवादों को सुलझाने में न्यायाधिकरण की भूमिका पर प्रकाश डाला।
न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि नीति बनाने वालों, नियामक संस्थाओं, उद्योग जगत और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के बीच उपलब्ध विवाद समाधान व्यवस्थाओं के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। साइबर विवादों के बारे में उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत पांच करोड़ रुपये तक के मुआवजे से जुड़े दावों पर शुरुआत में नियुक्त अधिकारी फैसला करते हैं। इसके बाद इन मामलों में अपील सुनने का काम टीडीएसएटी करता है। उन्होंने कहा कि पांच करोड़ रुपये से अधिक के दावे नियुक्त अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं और ऐसे मामलों की सुनवाई सक्षम सिविल कोर्ट द्वारा की जाती है।
तेलंगाना उच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. सुरेंद्र रेड्डी, महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी भी इस अवसर पर मौजूद थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित