अलवर , जुलाई 27 -- राजस्थान में अलवर में भगवान जगन्नाथ और माता जानकी के 171वें दिव्य विवाह महोत्सव के बाद सोमवार शाम अलवर की पावन धरती एक बार फिर भक्ति, आस्था और भावनाओं के अद्भुत संगम की साक्षी बनी।
भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी माता जानकी को राजसी रथ में विराजमान करके रुपवास से पुराना कटला स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर के लिए रवाना हुए। यह दिव्य रथ यात्रा मंगलवार को सुबह करीब तीन बजे मंदिर पहुंचेगी, जहां भगवान के स्वागत की भव्य तैयारियां की गयी हैं।
रथ यात्रा के प्रस्थान के साथ ही पूरा रुपवास क्षेत्र "जय जगन्नाथ" और "जय जानकी मैया" के जयघोषों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। महिलाओं ने बेटी की विदाई की परंपरा निभाते हुए भावुक विदाई गीत गाये। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि कई महिलाओं की आंखें नम हो गयी।
रुपवास के श्रद्धालु माता जानकी को अपनी बेटी मानते हैं। विवाह के बाद उनकी विदाई भी उसी आत्मीयता और प्रेम से की जाती है, जैसे किसी घर की बेटी की विदाई होती है। ऐसे में भगवान और माता जानकी की यह वापसी पूरे शहर के लिए किसी महापर्व से कम नहीं है।
रथ यात्रा मार्ग को भव्य रूप से सजाया गया है। जगह-जगह रंग-बिरंगी रोशनी, पुष्प सज्जा और स्वागत द्वार बनाये गये हैं। श्रद्धालुओं के लिए पूरे रास्ते में भंडारों की व्यवस्था की गयी है, जहां प्रसाद और जलपान वितरित किया जा रहा है। शाही रथ के साथ चल रहे विशाल लवाजमे ने यात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार यात्रा की निगरानी कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
विशेष बात यह है कि अलवर शहर के करीब 55 मंदिरों में भगवान जगन्नाथ और माता जानकी के स्वागत में आरती की जायेगी। पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर को भी विशेष रूप से सजाया गया है, जहां भगवान के आगमन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
जिस राजसी वैभव और विशाल लवाजमे के साथ भगवान जगन्नाथ अपनी दुल्हन माता जानकी को ब्याहने रुपवास पहुंचे थे, उसी दिव्यता, गरिमा और उत्साह के साथ अब वे अपनी जानकी मैया को लेकर वापस अपने धाम लौट रहे हैं।
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