वाराणसी , अक्टूबर 13 -- श्री काशी विश्वनाथ धाम में मंगलवार को नमामि गंगे की ओर से नवरात्र के अवसर पर देवी दुर्गा के प्रकृति संरक्षण के संदेश को अपनाने की अपील की गई। इस दौरान बाबा दरबार में स्थापित भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दुर्गा स्वरूपा महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि मां दुर्गा की उपासना और नवरात्र का पर्व प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का गहरा संदेश देता है। भारतीय परंपरा में शक्ति की आराधना का संबंध प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के संतुलन से जुड़ा है। दुर्गा सप्तशती का श्लोक 'या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति-रूपेण संस्थिता' भी इस संदेश को अभिव्यक्त करता है कि देवी समस्त प्राणियों में प्रकृति के रूप में विद्यमान हैं।

उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान नौ प्रकार के पौधों एवं पत्तों से नवपत्रिका का निर्माण और पूजन किया जाता है। यह परंपरा कृषि, वनस्पतियों और प्रकृति के पुनर्जीवन का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से नवरात्र के अवसर पर जल संरक्षण, वृक्षारोपण और नदियों की स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

श्री शुक्ला ने कहा कि पारंपरिक रूप से मां दुर्गा की प्रतिमाओं के निर्माण में तालाबों और नदियों की मिट्टी का उपयोग किया जाता है। विसर्जन के बाद यह मिट्टी पुनः प्रकृति में मिल जाती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण से ही जीवन और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

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