रांची , मई 04 -- झारखंड के दुमका स्थित एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने कांग्रेस के पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव को एक वर्ष की सजा सुनाई है।

हालांकि सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद ही उन्हें जमानत भी मिल गई। यह मामला वर्ष 2010 का है, जब देवघर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के प्रदर्शन के दौरान देवघर समाहरणालय परिसर में हंगामा हुआ था। इस दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए लोगों को प्रदीप यादव ने जबरन छुड़ा लिया था।

एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सह एसडीजेएम मोहित चौधरी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत प्रदीप यादव को एक साल की सजा सुनाई। वहीं बचाव पक्ष की ओर से दाखिल जमानत याचिका को अदालत ने स्वीकार करते हुए दस हजार रुपये के दो मुचलकों पर एक माह के लिए जमानत दे दी।

इस मामले में सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह समेत 15 अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि रणधीर सिंह भी उस समय झाविमो से जुड़े थे।

मामले की सुनवाई के दौरान कुल छह गवाह अदालत में प्रस्तुत किए गए। घटना 15 सितंबर 2010 की है, जब देवघर को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर तत्कालीन झाविमो विधायक प्रदीप यादव के नेतृत्व में सड़क से लेकर समाहरणालय तक प्रदर्शन किया गया था।

प्राथमिकी में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुधीर कुमार मोदी ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर देवघर स्टेडियम में रखा गया था, जहां प्रदीप यादव पहुंचे और बलपूर्वक लोगों को छुड़ा ले गए। इसके बाद उन्होंने देवघर मंडल कारा के सामने सड़क जाम कर दिया। पुलिस के पहुंचने पर वे अपने समर्थकों के साथ वहां से चले गए।

फैसले के बाद प्रदीप यादव ने कहा कि वे इस निर्णय से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि सुनवाई के दौरान किसी भी ऐसे व्यक्ति का नाम सामने नहीं आया, जिसे कथित रूप से छुड़ाया गया हो। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेंगे।

उनके अधिवक्ता शंकर बसईवाला ने भी बताया कि अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी। वहीं रणधीर सिंह ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया है। उनके अधिवक्ता प्रतीक झा ने भी फैसले का स्वागत किया है।

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