भुवनेश्वर , जून 26 -- दुबई के अनिवासी भारतीय एवं ओडिशा के प्रसिद्ध स्कूबा गोताखोर प्रियदर्शी पाणिग्राही ने जॉर्डन के लाल सागर में डूबे लॉकहीड एल-1011 ट्रिस्टार यात्री विमान तक सफलतापूर्वक गोता लगाकर अपने अंतरराष्ट्रीय भूमिगत अन्वेषणों में एक और मील का पत्थर जोड़ दिया है।

यह दुनिया के सबसे अनोखे पानी के नीचे डूबे विमान के मलबों में से एक है।

श्री पाणिग्राही ने पिछले रविवार को जॉर्डन के एकमात्र तटीय शहर अकाबा के तट पर समुद्र में डूबे हुए विमान तक यह गोता लगाया था। तीन सौ सीटों वाले और 50 मीटर लंबे इस विमान ने 1983 में व्यावसायिक सेवा शुरू की थी। उसे सेवानिवृत्ति के बाद अगस्त 2019 में एक कृत्रिम चट्टान और समुद्री आवास बनाने के लिए जानबूझकर डुबो दिया गया था। यह अब सतह से 18 से 28 मीटर नीचे स्थित है और इस क्षेत्र के सबसे पसंदीदा मलबा-गोताखोरी स्थलों में से एक बनकर उभरा है।

श्री पाणिग्राही ने 94 फीट (28.7 मीटर) की गहराई तक जाकर आज तक का अपना सबसे गहरे मलबे के भीतर प्रवेश करने वाला गोता पूरा किया। वे पानी में डूबे यात्री केबिनों के बीच तैरे, मलबा बन चुके विमान के गलियारों से होकर गुजरे, कॉकपिट का बारीकी से निरीक्षण किया और विमान के एक दरवाजे से बाहर निकले।

श्री पाणिग्राही ने कहा, "यह समुद्र के नीचे विमानन इतिहास की यात्रा करने जैसा था। एक ऐसे यात्री विमान के भीतर तैरना जो कभी 30,000 से 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ता था और अब समुद्र तल पर विश्राम कर रहा है, एक अलौकिक और अविस्मरणीय अनुभव है।"श्री पाणिग्राही ने एशिया, अफ्रीका और यूरोप के मालदीव, मलेशिया, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और साइप्रस सहित कई प्रसिद्ध स्थलों पर गोताखोरी की है। उन्हें भारत के ओडिशा प्रांत के समुद्र की गहराई में साहसिक गोताखोरी वाले प्रमुख गोताखोर के रूप में पहचान मिली है।

गोताखोरी के प्रति उनके इस जुनून को उनकी बेटी तीस्या पाणिग्राही भी साझा करती हैं। दोनों स्कूबा गोताखोर हैं। उन दोनों की गिनती ऐसी चुंनिंदा पिता-पुत्री की जोड़ियों में की जाती है, जो स्कूबा गोताखोरी करती हैं।

श्री प्रियदर्शी पूर्व केंद्रीय मंत्री और तीन बार के सांसद दिवंगत श्रीबल्लभ पाणिग्राही और शिक्षाविद् दिवंगत सुनंदा पाणिग्राही के पुत्र हैं।

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