जयपुर , जून 16 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने शिक्षा को ही ज्ञान का बड़ा आधार बताया है और कहा है कि इसके जरिए भारत को विश्वभर में श्रेष्ठ बनाने के प्रयास होने चाहिए।

श्री बागडे मंगलवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'एजुकेशन समिट' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभा की दुनियाभर में मांग है। उन्होंने बच्चों की बौद्धिक क्षमता विशिष्ट क्षेत्रों में विकसित किये जाने पर जोर दिया। नयी शिक्षा नीति के तहत उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान के आलोक में विकसित भारत के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में बच्चों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कार निर्माण के लिए कार्य किये जाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि शिक्षा से विकास को सही मायने में गति दी जा सकती है। संवाद से सुसंवाद होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो आविष्कार हुए, उनका श्रेय पश्चिम ने ले लिया। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहला विमान मुंबई के संस्कृत विद्वान शिवकर बापूजी तलपड़े ने उड़ाया, लेकिन श्रेय राइट बंधुओं को मिला। इसी तरह गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भास्कराचार्य था, दुनिया में न्यूटन प्रसिद्ध हुए। उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान का नयी पीढ़ी में प्रसार किये जाने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि विश्व में जब कहीं विश्वविद्यालय नहीं था, तब भारत में 19 विश्वविद्यालय थे। उन्होंने कहा कि ईस्वी सन् 725 में रावल पिंडी में तक्षशिला विश्वविद्यालय विश्व का श्रेष्ठ शिक्षा केंद्र था। राज्यपाल ने बप्पा रावल की महानता की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अरबों को भारत से खदेड़ा। उनके नाम से ही बाद में पाकिस्तान का रावल पिंडी स्थान हुआ।

उन्होंने कहा कि गुरुकुल पद्धति भारत की श्रेष्ठ शिक्षा पद्धति रही है। गुरुकुल में किसी एक विषय का नहीं सभी विषयों का ज्ञान दिया जाता था। उन्होंने "गुरुकुल गये रघुराई अल्प काल में शिक्षा पायी" चौपाई की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान राम ने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की, इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम बने।

श्री बागडे ने विनोबा भावे के कहे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आजाद होने के साथ ही जैसे अंग्रेजों का झंडा उतारा गया और बदला गया उसी तरह देश की शिक्षा नीति बदली जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति हमें दी, उसका मूल आधार ही यही था कि अंग्रेजी के ज्ञान के साथ पश्चिम को श्रेष्ठ साबित किया जाये। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि घरेलू उद्योग बंद किये जायें, ताकि भारत के लोग भूखे रहे और सदा अंग्रेजों पर आश्रित रहे और गुलाम बने रहे। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति भारतीयता के मूल्यों में गूंथी हुई है। इसके आलोक में देश को हर क्षेत्र में अग्रणी करने के प्रयास किए जायें।

इससे पहले राज्यपाल ने वहां शैक्षिक उन्नयन और कौशल शिक्षा से जुड़े विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित