शिलांग , मई 12 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने सोमवार को री-भोई जिले के भोइरिम्बोंग में एरी रेशम धागा निर्माण इकाई 'साई लुम' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने जानकारी दी कि मेघालय दुनिया में एरी कोकून का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, जहाँ सालाना लगभग 700 टन कोकून का उत्पादन होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एरी कोकून से रेशम का धागा बनने की प्रक्रिया के बीच जो तकनीकी अंतर था, वह अब तक राज्य की रेशम मूल्य श्रृंखला की सबसे बड़ी बाधा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी उत्पादन के बावजूद, स्थानीय स्तर पर कताई सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को अक्सर अपने कोकून कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता था। वहीं दूसरी ओर, बुनकरों को वही धागा ऊंची कीमतों पर वापस खरीदना पड़ता था। श्री संगमा ने विश्वास व्यक्त किया कि 'साई लुम' जैसे नए उद्यम कोकून और धागा उत्पादन के बीच की इस खाई को पाटेंगे। री-भोई जिला वर्तमान में राज्य में रेशम उत्पादन का मुख्य केंद्र है, जहाँ लगभग 7,900 रेशमकीट पालक और 4,760 बुनकर इस कार्य में लगे हैं।
इस परियोजना की कुल लागत 1.20 करोड़ रुपये है, जिसे उद्यमी के निजी निवेश के साथ-साथ 'प्राइम मेघालय' और 'उत्तर पूर्व प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं अनुसंधान केंद्र' (नेक्टर) के सहयोग से विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि अब तक मेहनत के हिसाब से हितधारकों को उचित मुनाफा नहीं मिल सका है, इसलिए सरकार इस क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। इस नई इकाई की कताई क्षमता प्रतिदिन 25-30 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले एरी धागे की है, जिससे सालाना लगभग 7.5 टन धागे का उत्पादन संभव होगा।
एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह इकाई स्थानीय किसानों से सीधे उचित और स्थिर कीमतों पर एरी कोकून खरीदेगी, जिससे किसानों की बाजार संबंधी अनिश्चितता समाप्त हो जाएगी। साथ ही, यह इकाई कोकून को संसाधित कर उच्च गुणवत्ता वाला धागा बनाएगी और इसे स्थानीय बुनकर समूहों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराएगी। इससे बुनकरों की लागत कम होगी, बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और पूरी मूल्य श्रृंखला में कीमतों में स्थिरता आएगी।
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