नयी दिल्ली , अगस्त 12 -- हाथियों के संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और उनके सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों को उजागर करने के उद्देश्य से बुधवार को दुनियाभर में 'विश्व हाथी दिवस' मनाया जा रहा है। 12 अगस्त 2012 को पहली बार मनाया गया यह दिवस एशियाई और अफ्रीकी हाथियों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयासों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है।

दुनिया भर की संस्कृतियों में हाथी को हमेशा से प्रेम, आदर और श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता रहा है। इसके बावजूद, मानव गतिविधियों के कारण आज यह विशाल और राजसी जीव विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया है।

एशियाई और अफ्रीकी दोनों प्रजातियों के हाथियों के सामने आज अवैध शिकार, आवास स्थलों का विनाश, मानव-हाथी संघर्ष और कैद में दुर्व्यवहार सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर ऑर्निथोलॉजी के डॉ. स्टीफन ब्लेक का कहना है कि हाथी सिर्फ एक प्राकृतिक संसाधन बनकर रह गए हैं, जो एक तरफ मानवीय लालच और दूसरी तरफ मानवीय जरूरतों के बीच पिस रहे हैं। जब तक लोग प्रकृति से फिर से नहीं जुड़ेंगे, वे कारण और प्रभाव के इस अंतर्संबंध को नहीं समझ पाएंगे।

हाथियों और वन्यजीवों के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास भी तेज हुए हैं। कनाडा ने इस अवसर पर बताया कि 2024 में कच्चे हाथीदांत और गैंडों के सींगों के आयात-निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

दूसरी ओर, मानव-हाथी संघर्ष को रोकने और हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर 'मारा एलीफेंट प्रोजेक्ट' (एमईपी) ने एक विशेष फंडरेजिंग अभियान शुरू किया है। इसके तहत जुटाए जाने वाले 50,000 डॉलर का इस्तेमाल ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित करने और हाथियों की त्वरित निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक के विस्तार में किया जाएगा।

गौरतलब है कि भारत में प्रोजेक्ट एलीफेंट 1992 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य हाथियों, उनके प्राकृतिक आवास और प्रवासी गलियारों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष को कम करना और कैद में रखे हाथियों के कल्याण को सुनिश्चित करना है।

इसके अलावा, हाथियों के महत्वपूर्ण आवासों को सुरक्षित रखने के लिए देश में 33 एलीफेंट रिजर्व स्थापित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में हाथियों के आवास और उनके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। साथ ही 15 हाथी-बहुल राज्यों में 150 हाथी गलियारों की पहचान की गई है, ताकि हाथियों के एक जंगल से दूसरे जंगल तक आवागमन को सुरक्षित बनाया जा सके।

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