जयपुर , जनवरी 28 -- दुनिया के सर्वाइकल कैंसर मामलों के लगभग 20 प्रतिशत मामले भारत में है लेकिन समय रहते इसकी पहचान कर इसे पूरी तरह रोका और ठीक किया जा सकता है।

जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल की अतिरिक्त निदेशक एवं ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ, डॉ स्मिता वैद ने सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरुकता बढ़ाने के तहत बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले उन कैंसरों में से एक है जिसे समय रहते पहचान कर पूरी तरह रोका और ठीक किया जा सकता है।

डॉ वैद ने बताया कि दुनिया के सर्वाइकल कैंसर मामलों के लगभग 20 प्रतिशत मामले भारत में है लेकिन नियमित जांच से इस बीमारी के जोखिम को 70 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि भारत में हर साल हज़ारों महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जागरूकता की कमी, नियमित जांच न कराना और देर से इलाज शुरू होना है। सर्वाइकल कैंसर आमतौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) नामक वायरस के लंबे समय तक बने रहने वाले संक्रमण से होता है। यह वायरस बहुत आम है और यौन संपर्क से फैलता है। ज़्यादातर मामलों में शरीर की इम्यूनिटी एचपीवी को खत्म कर देती है लेकिन अगर संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो यह गर्भाशय ग्रीवा में ऐसे बदलाव कर सकता है जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।

उन्होंने बताया कि 95 प्रतिशत से अधिक सर्वाइकल कैंसर एचपीवी संक्रमण से जुड़े होते हैं और शुरुआती चरण में इसके कोई लक्षण नहीं होते। यही वजह है कि समय पर जांच कराना बेहद ज़रूरी है। अगर बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाए, तो इलाज आसान होता है और 90 प्रतिशत से अधिक महिलाएं पूरी तरह ठीक हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सर्वाइकल हेल्थ अवेयरनेस सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने की अपील है। एक साधारण जांच न सिर्फ बीमारी को रोक सकती है बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित कर सकती है।

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