कोटा , मार्च 04 -- राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने यहाँ कोटा जिले के कैथुन कस्बे में धुलेंडी के दिन प्रति वर्ष आयोजित होने वाले पारम्परिक विभीषण मेले का उदघाटन किया।

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि पिछले 45 वर्षो से आयोजित हो रहे इस मेले मे हिरणयाकश्यप का पुतला बनाया जाता है। आसपास क्षेत्र के मंदिरों से देव विमान शोभायात्रा के साथ विभीषण मंदिर पहुंचते हैं। विधिविधान से पूजन के बाद सभी देव विमान मेला स्थल पहुंचते हैं। जहाँ आतिशबाज़ी के बाद मुख्य अतिथि द्वारा हिरणयाकश्यप के पुतले का दहन किया जाता है।

सूत्रों ने बताया कि इस बार शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर मेले मे मुख्य अथिति थे। श्री दिलावर ने पहले विभीषण मंदिर पहुंचकर विभीषणजी के दर्शन किये और उसके बाद मेला स्थल पहुंचकर हिरणयाकश्यप के पुतले का दहन किया!इस अवसर पर श्री दिलावर ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। मेलों से समाज में मेल-जोल बढ़ता है। मेले का अर्थ ही मिलाप है। उन्होंने कहा कि विभीषण जी धर्मात्मा थे और प्रभु राम के बड़े भक्त थे। अधर्म के पथ पर चल रहे अपने भाई का साथ छोड़कर उन्होंने प्रभु श्री राम का साथ दिया!श्री दिलावर ने कहा कि इस मंदिर की भूमि को कालांतर में वक़्फ़ की संपत्ति बताकर कब्जा कर लिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने नए वक़्फ़ संशोधन कानून को पारित किया है जिसके आधार पर अब केवल वही संपत्ति वक़्फ़ के नाम दर्ज होगी जो मुस्लिम समाज द्वारा दान की गई हो। इसके अतिरिक्त कोई संपत्ति या जमीन वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज नहीं होगी।

इसी कानून के सहारे से वर्षों से न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हिंदू समाज के लोगों को जीत मिली और कब्जाई गई विभीषण मंदिर की जमीन वापस हिंदू समाज को सौंपने के आदेश न्यायालय ने दिए।

उन्होंने कहा कि मंदिरों की जमीन पर कोई कब्जा न कर सके इसके लिए राज्य सरकार ने आदेश निकाल दिया है कि अब आबादी क्षेत्र में स्थित सभी मंदिरों को उनकी जमीन के पट्टे सरकार देगी। जिससे मंदिरों की जमीन पर मंदिर का मालिकाना हक होगा और कोई भी अवैध अतिक्रमण नहीं कर सकेगा। साथ ही यह प्रावधान किया गया है कि मंदिर के नाम की जमीन का पट्टा किसी व्यक्ति के नाम न होकर मंदिर की मूर्ति के नाम होगा। श्री दिलावर ने घोषणा की कि राज्य के सभी मंदिरों की जमीनों का सर्वेक्षण कर लिया गया है। शीघ्र ही राज्य में मंदिरों को पट्टे बनाकर दिए जाएंगे।

राजस्थान के कोटा के निकट कैथून में स्थित विभीषण मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है। यह करीब पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है।

कहा जाता है कि रामराज्याभिषेक के बाद, विभीषण ने भगवान शिव और हनुमान जी को भारत भ्रमण कराने की इच्छा जताई। वे एक विशाल कांवड़ में उन्हें बिठाकर निकले। कैथून (प्राचीन नाम कौथुनपुर या कनकपुरी) में जब विश्राम के लिए कांवड़ जमीन पर टिकी, तो शर्त के अनुसार वे यहीं रुक गए। माना जाता है कि चौरचौमा में महादेव और रंगबाड़ी में हनुमान जी स्थापित हुए, जबकि कैथून में विभीषण रुक गए।

यह प्रतिमा धड़ से ऊपर की है और शेष भाग जमीन में धंसा हुआ है। यह मंदिर पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है।

यहाँ हर वर्ष होली के आसपास सात दिवसीय मेला लगता है। यह देश का इकलौता स्थान है जहाँ होलिका दहन के बाद धुलंडी पर हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया जाता है।

मंदिर के वर्तमान ढांचे के बारे में कहा जाता है कि इसे करीब 1770-1821 में महाराव उम्मेदसिंह प्रथम ने बनवाया था।

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