पटना , जून 07 -- पंचायती राज विभाग की पहल 'दीदी अधिकार केंद्र' (डीएके) के सक्रिय हस्तक्षेप, जनप्रतिनिधियों की सतर्कता और प्रशासनिक सहयोग से रोहतास जिले में बाल विवाह के कई मामलों को रोका गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समाज में जागरूकता बढ़ाने और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से संचालित दीदी अधिकार केंद्र कानूनी सहायता, काउंसलिंग और सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिले में डीएके के हस्तक्षेप से पांच प्रमुख मामलों में बाल विवाह सफलतापूर्वक रोके गए।

शिवसागर गांव में 15 वर्षीय दुर्गा कुमारी की शादी सामाजिक दबाव और अशिक्षा के कारण जबरन हो रही थी। रस्में पूरी हो चुकी थीं, लेकिन सरपंच गीता देवी ने हार नहीं मानी। ऐन वक्त पर पहुंचकर उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि शादी भले हो गई हो, लेकिन लड़की की विदाई की कोशिश की तो सबको जेल भिजवा दूंगी। सरपंच के कड़े रुख और डीएके के सहयोग से मामला दर्ज कराया गया एवं कानूनी बांड बनवाया गया। आज दुर्गा अपने मायके में रहते हुए 10वीं कक्षा में पढ़ रही है।

तिलौथू प्रखंड के चन्दन गांव में 15 वर्षीय ज्योति कुमारी के पिता परिवार की जिम्मेदारी से बचने के लिए उसकी शादी कराने पर तुल गए। मुखिया विनोद राम, स्थानीय पंच और गांव वालों के साथ डीएके ने तुरंत कदम उठाया। चाइल्डलाइन (1098) पर कॉल कर बाल संरक्षण पदाधिकारी को सूचित किया गया। कानूनी सहयोग से बाल विवाह रोका गया। आज ज्योति किशोरी समूह की सक्रिय सदस्य बनकर अपनी जिंदगी संवार रही है।

बाराडीह गांव में 14 वर्षीय संध्या कुमारी अपने बूढ़े दादा-दादी के साथ रहती थी। परवरिश के बोझ से घबराकर दादा-दादी उसकी शादी तय कर चुके थे। वार्ड कमिश्नर अहसान अंसारी के समझाने और डीएके, पंचायत प्रतिनिधि, सक्षमा दीदी एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं के निरंतर प्रयास से दादा-दादी ने शादी का इरादा त्याग दिया। संध्या अब सुरक्षित माहौल में अपनी पढ़ाई जारी कर रही है।

ताराचंडी में गरीबी के कारण 15 वर्षीय पूजा कुमारी की शादी तय हो गई थी। पंचायत प्रतिनिधि सोनू कुमार ने सजग नागरिक की भूमिका निभाते हुए 1098 और 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचित किया। डीएके के समन्वय में बीडीओ, सीडीपीओ, आंगनवाड़ी सेविका और विकास मित्र की पूरी टीम मौके पर पहुंची। परिवार को बाल विवाह के कानूनी परिणामों और लड़की की शिक्षा के महत्व से अवगत कराया गया, जिससे शादी रुक गई।

राजपुर प्रखंड के मगरवालिया पंचायत में 17 वर्षीय इंटर छात्रा बेबी कुमारी पर समाज और आर्थिक तंगी के दबाव में शादी का खतरा मंडरा रहा था। मुखिया इंद्रजीत कुमार, सरपंच मिथिलेश राय, वार्ड सदस्य नीलम देवी, पंच सीता देवी और डीएके समिति ने मिलकर अभियान चलाया। परिवार से बातचीत, बीडीओ से मुलाकात और ग्राम संगठन की सामाजिक कार्य समिति के प्रयास से बेबी की पढ़ाई बच गई।

विभागीय अधिकारियों ने कहा कि इन मामलों में जिला प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से बाल विवाह की घटनाओं को रोका जा सका। उन्होंने कहा कि बाल विवाह उन्मूलन के लिए समाज को अशिक्षा, गरीबी और रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर किशोरियों की शिक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देनी होगी।

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