दरभंगा , अगस्त 06 -- बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य कला संकायाध्यक्ष सह विभागाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह 'काव्या' ने कहा कि दीक्षारंभ केवल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में एक नई दिशा, नई जिम्मेदारी और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। सत्र 2026-28 के प्रथम सेमेस्टर में संगीत एवं नाट्य विषय में नामांकित छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित दीक्षारंभ समारोह का दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ करते हुए प्रोफेसर लावण्या कीर्ति सिंह काव्या ने कहा कि नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए दीक्षा आरंभ कार्यक्रम विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयीय शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और अपनी कला के प्रति समर्पण के भाव से जोड़ने का महत्वपूर्ण चरण है।
उन्होंने कहा कि विभाग में सभी नवागंतुकों का हार्दिक स्वागत है और हम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। विद्यार्थियों को अपने पथ पर आगे बढ़ने में विभाग हर संभव सहयोग और प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने पाठ्यक्रम के अनुरूप पूरी निष्ठा और परिश्रम के साथ अध्ययन करना चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृति के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है। कला के क्षेत्र में सफलता के लिए अध्ययन के साथ अनुशासन, संस्कार, सृजनशीलता और निरंतर अभ्यास आवश्यक है।
इस अवसर पर नवागंतुक छात्र-छात्राओं ने अपने शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों एवं वरीय छात्र-छात्राओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अपने अध्ययन को सुचारू एवं अनुशासित रूप से करने का संकल्प लिया।
इसके बाद सत्र 2025-27 के तृतीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान एवं कुलगीत का सामूहिक गायन प्रस्तुत किया।
नवीन छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने देवी गीत एवं कजरी का सामूहिक गायन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन बिहार गीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
अंत में तृतीय सेमेस्टर एवं प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने एक-दूसरे को मिष्ठान्न खिलाकर आत्मीयता एवं सौहार्द का परिचय दिया तथा नए शैक्षणिक सफर में एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
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