पौड़ी गढ़वाल,28मार्च(वार्ता) उत्तराखंड (पौड़ी गढ़वाल) के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) पहुंचे। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा वानिकी, औद्यानिकी और कृषि के 283 छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी डिग्रियां व उपाधियां प्रदान की गई।
इससे पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में बने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पार्क में उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके उपरांत उन्होंने सभा कक्ष, ई-गवर्नेंस पोर्टल व ई-फाइलिंग डिजिटाइजेशन मॉड्यूल का उद्घाटन किया। प्रशासनिक, शैक्षणिक भवन एवं ट्रांसिट हॉस्टल निर्माण कार्य का शिलान्यास, बहुद्देशीय भवन का लोकार्पण किया।
तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने बीएससी ऑनर्स के साक्षी वर्मा, प्रदीप कुमार, संजना बिष्ट, मैत्रेय नौटियाल, युक्ता लोहनी को स्वर्ण पदक प्रदान किया। जबकि इशिता नेगी, सवेरा पंवार, श्वेता सेमवाल, सुहर्षिता बहुगुणा को रजत पदक से सम्मानित किया।
राज्यपाल ने उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्ति का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे उनके परिश्रम, समर्पण और अनुशासन का परिणाम बताया।
राज्यपाल ने कहा कि कृषि, औद्यानिकी और वानिकी उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन क्षेत्रों में नवाचार व आधुनिक तकनीक अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करें तथा पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को अवसर में बदलें।
उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए शोध को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया और स्वर्ण व रजत पदक विजेताओं को बधाई देते हुए सभी विद्यार्थियों को ईमानदारी, नैतिकता और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
राज्यपाल सहित अन्य अतिथियों द्वारा यूनिवर्सिटी सोवेनियर, कॉफी टेबल बुक, विश्वविद्यालय का विजन डॉक्यूमेंट 2027, प्रोसिडिंग 14वीं ब्रेन स्टोर्मिंग सेशन पुस्तकों का विमोचन किया गया।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीक्षांत समारोह में उपस्थितों को वर्चुअल माध्यम से श्रेष्ठ व उपाधि प्राप्त कर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस विश्विद्यालय में नवाचार का परिवेश है। उन्होंने कहा कि कृषि, औद्यानिकी और वानिकी केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं है बल्कि सांस्कृतिक धरोवर व पर्यावरणीय पहचान के अभिन्न अंग है। आज आप केवल एक उपाधि प्राप्त नहीं कर रहे हैं बल्कि जिम्मेदारी को भी स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहते हुए बताया कि आपका ज्ञान व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रखकर राज्य और राष्ट्र के कल्याण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आपके द्वारा अर्जित ज्ञान और कौशल पर्वतीय कृषि की चुनौतियों को अवसर में बदलेगा।
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