, Aug. 5 -- कुलाधिपति ने कहा कि जब विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ संस्कार, प्रतिभा के साथ अवसर और ज्ञान के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय करेंगे, तब हमारे गाँवों का प्रत्येक प्रतिभाशाली बालक और बालिका राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में अपना सशक्त योगदान देगा। यही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि, आज का युग तकनीक और अवसरों का युग है। यह वह समय है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा साइंस और आधुनिक प्रौद्योगिकी भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया उन देशों का नेतृत्व स्वीकार कर रही है, जो ज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्षमता में आगे बढ़ रहे हैं। अभी हाल ही में डिजिटल इंडिया ने अपने सफल 11 वर्ष पूरे किए हैं। इन वर्षों में भारत ने डिजिटल परिवर्तन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसने शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाया है। सरकारी सेवाएँ आज तकनीक के माध्यम से घर-घर तक पहुँच रही हैं। डिजिटल भुगतान ने आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है, लेन-देन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है, तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंच रहा। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि और जनसेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में डिजिटल इंडिया ने नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

राज्यपाल ने कहा कि आज का भारत बदल चुका है। अब हम केवल दूसरों की तकनीक पर निर्भर रहने वाले नहीं हैं। आज हम अपने ज्ञान, कौशल, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा श्रमिकों के सामर्थ्य से नई तकनीक का निर्माण करने वाला आत्मविश्वासी राष्ट्र हैं। भारतीय नौसेना में आईएनएस दूनागिरि, आईएनएस संशोधक, आईएनएस अग्रय और आईएनएस महेंद्रगिरि जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं। जिसकी डिज़ाइन से लेकर निर्माण तक, हर चरण भारत की प्रतिभा, तकनीक और श्रम की पहचान कराती है, यही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक शक्ति है। राज्यपाल महोदया ने कहा कि मेड इन इंडिया सी-295 विमान का निर्माण यह सिद्ध करता है कि भारत अब केवल आकाश की ओर देखता ही नहीं, बल्कि अपने सपनों को अपने ही पंखों से उड़ान देना भी जानता है। भारत में ऐसे 40 विमानों का निर्माण हो रहा है। डीआरडीओ द्वारा विकसित ''लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल'' का सफल परीक्षण इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को स्वदेशी तकनीक से पूरा करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और यह परिवर्तन यहीं नहीं रुकता। गगनयान मिशन भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य का नया अध्याय है। इस मिशन के माध्यम से भारत पहली बार अपने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निम्न कक्षा में भेजकर सुरक्षित वापस लाने की क्षमता विकसित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत का स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम भविष्य की रक्षा तकनीक की दिशा तय कर रहा है। पाँचवीं पीढ़ी का यह स्टील्थ लड़ाकू विमान आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप भारत की स्वदेशी क्षमता का प्रतीक होगा। उन्होंने विधार्थियों से कहा कि राष्ट्र केवल सीमाओं की रक्षा से महान नहीं बनता, बल्कि प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध, विश्वविद्यालयों में जन्म लेने वाले नवाचार और युवाओं के सपनों से महान बनता है। युवागण, आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। वर्ष 2047 में विकसित भारत का स्वप्न साकार करने की जिम्मेदारी आपके कंधों पर है। देश को आपकी ऊर्जा, कल्पनाशक्ति, प्रतिभा और आपके नवाचार की आवश्यकता है। लेकिन नशा इन सभी क्षमताओं का सबसे बड़ा शत्रु है। यह व्यक्ति को उसके लक्ष्य से भटका देता है, उसके सपनों को अधूरा छोड़ देता है और उसके परिवार, समाज तथा राष्ट्र के भविष्य को भी प्रभावित करता है। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा "नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान" का शुभारंभ हुआ, जिसमें देशभर के करोड़ों युवा 28,000 से अधिक स्थानों पर एक साथ जुड़कर इस जनआंदोलन के साक्षी बने। इस अभियान के अंतर्गत नशामुक्त भारत के निर्माण हेतु शपथ ली गई है और अगले 100 सप्ताह तक यह जनआंदोलन निरंतर आगे बढ़ेगा। जन भवन उत्तर प्रदेश में भी इस अभियान के अंतर्गत कई कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों में भी ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने व संचालित करने के निर्देश दिये गये हैं।

इस अवसर पर दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास कौशल तथा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अनुपमा कौशिक शर्मा ने संबोधित किया।

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