लखनऊ , अक्टूबर 08 -- उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में अपनी भूमिका तय करते हुए कृषि, मत्स्य पालन, विनिर्माण, मानव पूंजी तथा बुनियादी ढांचे के पांच प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2026 में प्रस्तावित मुख्य सचिवों के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य की ओर से इन प्राथमिकताओं को प्रस्तुत किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार ऐसी संभावना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाली यह महत्वपूर्ण बैठक लखनऊ में हो सकती है। उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने इसको लेकर सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को एक पत्र जारी कर मुख्य सचिवों की बैठक में शामिल किए गए विषयों को लेकर जानकारी मांगी है।

आलोक कुमार की ओर से जारी आदेश में पांच प्राथमिकता वाले विषयों को शामिल किया गया है। इसके अनुसार, उच्च मूल्य वाली कृषि एवं कृषि-प्रसंस्करण को पहले स्थान पर रखा गया है। इसके तहत मक्का, तिलहन, दलहन और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का संगठित संकलन, बाजार से बेहतर एकीकरण और प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका लक्ष्य खेती को मूल्यवर्धित कृषि, कृषि-प्रसंस्करण और कृषि निर्यात से जोड़ना है।

दूसरी प्राथमिकता मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि को दी गई है। इसके तहत जलीय कृषि उत्पादन बढ़ाने और एक्वा फार्मिंग के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार करने पर जोर रहेगा। वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र की प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

तीसरे क्षेत्र के रूप में विनिर्माण एवं औद्योगिकीकरण को चुना गया है। इसमें गलियारा आधारित और क्षेत्र विशेष के विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जाएंगे तथा इन्हें रसद, कौशल और बाजार से जोड़ा जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख विनिर्माण, निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला केंद्र बनाने की रणनीति है।

मानव पूंजी एवं रोजगार क्षमता चौथी प्राथमिकता है। इसके तहत एकीकृत कौशल एवं रोजगार व्यवस्था विकसित करने के साथ व्यावसायिक शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा। लक्ष्य प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को वैश्विक स्तर पर रोजगार योग्य और उत्पादक कार्यबल में बदलना है। पांचवीं प्राथमिकता बुनियादी ढांचा, रसद और हरित ऊर्जा है। इसके तहत एकीकृत आर्थिक क्षेत्र, बहु-माध्यम परिवहन आधारित रसद व्यवस्था और वितरित नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसका दीर्घकालिक उद्देश्य 1,000 अरब डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था के लिए भौतिक, रसद और ऊर्जा आधार तैयार करना तथा उत्तर प्रदेश को वैश्विक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाना है। दस्तावेज में मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे सत्र 'टेक्नोलॉजी इन गवर्नेंस' के लिए भी अवधारणा पत्र उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया है।

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