चंडीगढ़ , जुलाई 14 -- हरियाणा सरकार ने दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षा ऋण योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र छात्रों को भारत और विदेश में व्यावसायिक तथा तकनीकी शिक्षा के लिए 50 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण दिया जाएगा।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह योजना हरियाणा पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी दिव्यांग छात्र की पढ़ाई बीच में न रुके। योजना का लाभ विदेश में अध्ययन करने वाले पात्र छात्रों को भी मिलेगा।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हरियाणा का स्थायी निवासी होना, कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना तथा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में व्यावसायिक या तकनीकी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना आवश्यक है। सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए आयु सीमा 18 से 55 वर्ष निर्धारित की गयी है, जबकि मानसिक दिव्यांगता वाले आवेदकों के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष है। परिवार पहचान पत्र पीपीपी अनिवार्य होगा और 15 लाख रुपये या उससे अधिक के ऋण के लिए यूडीआईडी कार्ड भी जरूरी होगा।
ऋण राशि का उपयोग ट्यूशन फीस, शैक्षणिक खर्च और पढ़ाई से जुड़े अन्य आवश्यक व्ययों के लिए किया जा सकेगा। आवेदन के साथ आधार कार्ड, हरियाणा निवास प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, परिवार पहचान पत्र, प्रवेश पत्र, शुल्क विवरण, शैक्षणिक प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।
सरकार ने पात्र दिव्यांग छात्रों और उनके अभिभावकों से योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा है कि निगम समय-समय पर आवेदन आमंत्रित करेगा। योजना से दिव्यांग युवाओं को उच्च शिक्षा, कौशल विकास और बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
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