अगरतला , अगस्त 31 -- त्रिपुरा विधानसभा के अध्यक्ष रामपद जमातिया ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन को सदन से निलंबित कर दिया।
श्री बर्मन दरअसल तब दिवंगत डीजीपी की पत्नी के बयान का हवाला देकर कथित सुसाइड नोट का मुद्दा उठा रहे थे। इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कांग्रेस विधायक बीरजीत सिन्हा ने इस निलंबन की वैधानिकता पर सवाल उठाये। उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ताधारी दल के प्रस्ताव के बिना केवल अध्यक्ष की ओर से कार्रवाई नियमों के खिलाफ है।
श्री सिन्हा ने कहा कि निलंबन की कार्रवाई पर्याप्त आधार होने पर ही की जा सकती है, जिसे सदन के नेता पेश करते हैं और बहुमत की मंजूरी मिलती है। उन्होंने इस मामले में सही प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्री बर्मन ने जैसे ही दिवंगत डीजीपी के कथित सुसाइड नोट का संवेदनशील मुद्दा उठाया, अध्यक्ष ने तुरंत यह कार्रवाई कर दी। उनका सीधा मकसद इस मामले पर चर्चा दबाना है।
श्री सुदीप रॉय बर्मन दिवंगत डीजीपी के कथित सुसाइड नोट को लेकर लगातार सवाल उठा रहे थे। उन्होंने डीजीपी की पत्नी के बयानों का हवाला देते हुए उस सुसाइड नोट को सार्वजनिक करने की मांग की थी।
विधानसभा अध्यक्ष ने जारी जांच का हवाला देते हुए श्री बर्मन को इस विषय पर प्रश्न पूछने से रोका और उन पर सदन के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
व्यवस्था बनाये रखने की अध्यक्ष की अपीलों के बावजूद श्री बर्मन के नेतृत्व में विपक्षी विधायक वेल में डटे रहे, जिसके बाद उन्हें नियम 330 के तहत निलंबित कर दिया गया।
शुरुआत में बाहर जाने से इनकार करने के बाद, अध्यक्ष के निर्देश पर सुदीप रॉय बर्मन विपक्षी सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गये।
विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले की तीखी आलोचना की और पूरी कार्यवाही पर अपना असंतोष व्यक्त किया।
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