रायपुर , अक्टूबर 07 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने 73 वर्षीय गंभीर हृदय रोगी की एक ही सर्जरी में कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) और एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट कर उसकी जान बचाने में सफलता हासिल की है।
अस्पताल प्रबंधन से बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार दिल का दौरा पड़ने के बाद मरीज की हृदय की पंपिंग क्षमता महज 15 प्रतिशत रह गई थी। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति अब स्थिर है और उसे अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी की जा रही है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। मरीज को घर पर अचानक बेहोश होने के बाद गंभीर हालत में अस्पताल के आपातकालीन विभाग लाया गया था। अस्पताल पहुंचने के समय उसकी हृदय गति लगभग रुक चुकी थी।
आपातकालीन विभाग की टीम ने मरीज को तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), डीसी शॉक और डिफिब्रिलेशन दिया। दिल की धड़कन वापस आने के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया।
दिल के दौरे से उबरने के बाद की गई जांच में मरीज की हृदय की पंपिंग क्षमता (इजेक्शन फ्रैक्शन-ईएफ) केवल लगभग 15 प्रतिशत पाई गई। साथ ही उसकी तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज (ट्रिपल वेसल डिजीज) और एओर्टिक वाल्व में गंभीर सिकुड़न (सीवियर एओर्टिक स्टेनोसिस) का पता चला।
मरीज को कुछ दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट और गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया। स्थिति में सुधार के बाद वेंटिलेटर हटाकर उसे कार्डियक सर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया गया। ऑपरेशन से पहले करीब 23 दिनों तक कार्डियक सर्जरी आईसीयू में रखकर उसकी स्थिति को स्थिर करने का प्रयास किया गया।
उपचार के दौरान मरीज को एक्यूट किडनी इंजरी (किडनी फेल्योर) की समस्या भी हुई और कुछ समय के लिए पेशाब आना बंद हो गया था। इस कारण शुरुआती अवस्था में मरीज ऑपरेशन के लिए उपयुक्त स्थिति में नहीं था। स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उसे सर्जरी के लिए तैयार किया।
मरीज के परिजनों को उसकी गंभीर स्थिति और ऑपरेशन से जुड़े संभावित जोखिमों की विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें यहां तक बताया गया कि मरीज का ऑपरेशन थिएटर से निकल पाना मुश्किल है, इसके बावजूद परिजनों ने ऑपरेशन के लिए सहमति दी।
सीटीवीएस विभागाध्यक्ष एवं मुख्य सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए उसका कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्टिंग किया गया। हृदय की बंद कोरोनरी धमनियों में वेन एवं आर्टरी कंड्यूट का उपयोग करते हुए बाईपास बनाया गया। इसके बाद गंभीर रूप से संकुचित एओर्टिक वाल्व को हटाकर टाइटेनियम से निर्मित बायलीफलेट मैकेनिकल एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपित किया गया।
उन्होंने बताया कि इस मरीज की सर्जरी कई कारणों से बेहद चुनौतीपूर्ण थी। मरीज की उम्र 73 वर्ष थी, हाल ही में कार्डियक अरेस्ट हो चुका था, सीपीआर के बाद हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 15-20 प्रतिशत के आसपास थी, तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज था और साथ ही गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस भी था। ऐसी स्थिति में एक साथ सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट) और महाधमनी वाल्व प्रतिस्थापन करना अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और वर्तमान में वह चिकित्सकीय रूप से स्थिर है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उसे डिस्चार्ज करने की तैयारी की जा रही है। मरीज का उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया।
पी.टी.जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने जटिल सर्जरी की सफलता पर सीटीवीएस विभाग एवं पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर अस्पताल में गंभीर एवं जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, अत्याधुनिक सुविधाओं और बहुविषयक चिकित्सा टीम के माध्यम से मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। समय-समय पर किए जाने वाले ऐसे जटिल एवं चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के कारण लोगों का विश्वास संस्थान के प्रति दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
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