नयी दिल्ली , अक्टूबर 26 -- दिल्ली पुलिस के उत्तरी जिले ने 30 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन से जुड़े कथित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश कर सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, अब तक विभिन्न राज्यों की 27 साइबर धोखाधड़ी शिकायतें इस नेटवर्क से जुड़ी हैं।

मामला दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज की एक छात्रा से कुर्ती खरीदने के नाम पर 6,450 रुपये की ठगी की शिकायत की जांच के दौरान सामने आया। प्रयागराज निवासी छात्रा ने इंस्टाग्राम पर 'काव्या कुर्ती हब' नामक अकाउंट का विज्ञापन देखकर 799 रुपये का ऑर्डर दिया और क्यूआर कोड के जरिए 400 रुपये अग्रिम भुगतान किया। बाद में पार्सल डिलीवरी से जुड़े होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने पासकोड के बहाने उससे कई बार भुगतान कराया। पार्सल नहीं पहुंचा और पैसे भी वापस नहीं मिले।

जांच में पुलिस ने करीब 200 मोबाइल नंबरों, आईएमईआई विवरण, बैंक लेनदेन और फ्लिपकार्ट, जोमैटो तथा ब्लू डार्ट से मिले डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम ग्रेटर नोएडा स्थित किजेनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के केनरा बैंक खाते तक पहुंची।

16 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में छापेमारी कर आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा, राहुल कुमार और गौरव पांडेय को गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में 21 अक्टूबर को कानपुर से उदित प्रताप सिंह भदौरिया को पकड़ा गया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर फर्म बनाकर चालू बैंक खाते खुलवाए। करीब 25 बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किए जाने का संदेह है। इन खातों, बैंकिंग किट और सिम कार्ड को कथित तौर पर कमीशन के बदले आगे उपलब्ध कराया जाता था।

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