भुवनेश्वर , अक्टूबर 07 -- दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नीत 'इंडिया' गठबंधन के साथ मंच साझा करने के महज 24 घंटे के भीतर बीजू जनता दल (बीजद) ने एक बड़ा राजनीतिक यू-टर्न लिया है। बीजद ने गुरुवार को विपक्ष द्वारा बुलाए गए 12 घंटे के 'ओडिशा बंद' से खुद को पूरी तरह से अलग कर लिया है।
राजधानी नयी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद बीजद के इस फैसले ने पार्टी की राजनीतिक रणनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने हालांकि स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक गुट का हिस्सा नहीं है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखने की अपनी पुरानी नीति पर कायम है।
प्रमिला मलिक ने कहा, " बीजद गुरुवार के बंद का समर्थन नहीं करेगी। हमारी पार्टी किसी भी राजनीतिक गुट की घटक नहीं है। पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने हमेशा भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखने में विश्वास किया है।"वहीं, बीजद के प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक लेनिन मोहंती ने कहा कि दिल्ली के विरोध प्रदर्शन में पार्टी की भागीदारी एक विशेष मुद्दे पर केंद्रित थी और इसे 'इंडिया' गठबंधन के साथ जुड़ाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में विवादित भूमिका को लेकर पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर आठ अक्टूबर (गुरुवार) को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक ओडिशा बंद का आह्वान किया है। इस बंद को वामदलों सहित 'इंडिया' गठबंधन के 10 दलों का समर्थन प्राप्त है।
दिल्ली प्रदर्शन के तुरंत बाद बंद से बीजद के पीछे हटने के इस कदम ने एक बार फिर उसकी 'समान दूरी' की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित