नयी दिल्ली , जुलाई 30 -- राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर पुलिस बलों द्वारा लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए गुरुवार को उनके इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर बर्बरता की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की।

श्री खरगे राज्य सभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा में भाग ले रहे थे। इस विधेयक को बुधवार को लोक सभा ने पारित कर दिया है। कांग्रेस के नेता ने विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए एक भावनात्मक भाषण में कहा कि पेपर लीक में बड़ी संख्या में मासूमों को नुकसान हुआ, बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की पुलिस ने पिटायी की है और उनके मां-बाप परेशान हैं।

उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए एक निश्चित समय सारिणी बनाये जाने, दिल्ली में प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के साथ हुई बर्बरता की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र और उच्च-स्तरीय समिति कराने, पब्लिक सेक्टर और सरकारी संस्थानों के खाली पदों को भरने की मांग भी की।

विपक्ष के नेता ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर कार्रवाई के लिए जवाबदेही स्थापित किये जाने की मांग करते हुए सवाल किया, 'विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया? , आंसू गैस किसके आदेश पर छोड़ी गयी?, विद्यार्थियों पर पेलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी?, सादे कपड़ों में छात्रों की पिटाई करने वाले लोग कौन थे? दिल्ली पुलिस किसके नियंत्रण में काम करती है?, केन्द्रीय रिजर्व बल की आरएएफ किसके आदेश पर कार्य करती है? इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा जिम्मेदार (मास्टरमाइंड) कौन था? "श्री खरगे ने कहा, " देश इन सभी सवालों का जवाब चाहता है। यदि गृह मंत्री इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।"उन्होंने कहा कि यदि श्री शाह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो प्रधानमंत्री उन्हें बर्खास्त करें। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के गांवों और शहरों से आये विद्यार्थियों पर पेलेट गन चलायी गयी। कई छात्र अस्पतालों में भर्ती हैं। एक छात्र ने अपनी एक आंख खो दी है, जबकि कई अन्य विद्यार्थियों के हाथ और पैर टूट गये हैं। इसके लिए गृह मंत्री शाह जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा, " अमित शाह भले ही बंद कमरे में बैठकर यह सब सुन रहे हों, लेकिन वे अधिक समय तक बंद कमरे में नहीं छिप सकते, जनता उन्हें बाहर निकालकर जवाब मांगेगी।"इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति की।

श्री खरगे ने कहा कि दिल्ली आंदोलन के दौरान कई छात्रों के शरीर और आंखों में पेलेट गन के छर्रे लगे हैं।" यह सब देखकर हमें शर्म आती है, लेकिन सरकार को शर्म आती है या नहीं- यह हमें नहीं पता। विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी? यदि गृह मंत्री इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।"उन्होंने कहा, " नीट परीक्षा 2015, 2016, 2021, 2024 और 2026 तक पेपर लीक तथा गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रही है। 'मोदी की गारंटी' हर बार विफल साबित हुई है। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लगभग 1.25 लाख छात्रों ने आत्महत्या की है, यह सरकार की विफलता का परिणाम है। आज तक किसी भी पेपर लीक मामले में किसी को सजा नहीं मिली है। हर पेपर लीक विद्यार्थियों को यह संदेश देता है कि सरकार की नजर में उनकी मेहनत और परिश्रम का कोई मूल्य नहीं है।"उन्होंने कहा कि परीक्षाएं स्थगित हो जाती हैं, प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं, परिणाम देर से आते हैं और भर्तियां वर्षों तक अटकी रहती हैं। उन्होंने कहा, " हमारी मांग है कि सभी परीक्षाओं के लिए एक 'वार्षिक परीक्षा कैलेंडर' बनाया जाये, ताकि सरकार की जवाबदेही तय हो सके।"उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को संसद के समक्ष एक 'राष्ट्रीय युवा रोजगार रणनीति' प्रस्तुत करनी चाहिए। इस रणनीति में स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि देश में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाते हुए रोजगार सृजित करने वाले निवेश कैसे आकर्षित किये जाएंगे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार में 30 लाख से अधिक पद रिक्त हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार उन पदों पर भर्ती नहीं कर रही है। इसलिए उनका आग्रह है कि इन सभी रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाये।

विधेयक को लेकर श्री खरगे ने कहा, " जब जांच और न्याय की स्थिति ऐसी हो (ठीक न हो) , तो केवल कानून में कड़ी सज़ा का प्रावधान लिख देने से न्याय नहीं मिलेगा।"उन्होंने कहा कि आज सरकार फास्ट-ट्रैक अदालतों की बात करती है, लेकिन 2024 के नीट पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को क्लीन चिट दे दी गयी। सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन... 2026 के नीट पेपर लीक मामले में कुछ दिन पहले जब सुनवाई होनी थी, तब पहली ही सुनवाई में सीबीआई का वकील उपस्थित नहीं हुआ। स्थिति यह है कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हो चुके हैं। 'मोदी की गारंटी' हर बार विफल साबित हुई है।

उन्होंने कहा, " मोदी सरकार की विफलता का ताज़ा उदाहरण नीट यूजी-2026 है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक हो गया, परीक्षा रद्द करनी पड़ी और जांच में सामने आया कि परीक्षा से 15 दिन पहले ही पेपर बाजार में उपलब्ध था। शिक्षा व्यवस्था में घुसा एक संगठित गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में खुलेआम यह काम कर रहा था, लेकिन सरकार गहरी नींद में सोई रही। सवाल यह है कि सरकार की खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? "उन्होंने कहा, " यदि संस्थाएं वही रहेंगी, तो न एनटीए बदलेगा और न ही परीक्षा प्रणाली, और जवाबदेही भी तय नहीं होगी। फिर कुछ दिनों बाद एक और पेपर लीक होगा और हम सदन में फिर इसी विषय पर बहस करते रहेंगे।"श्री खरगे ने अपने भाषण के दौरान विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्राध्यापकों के पद पर राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोगों को भर्ती किये जाने और मनुवादी सोच के साथ काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने मनुस्मृति पर अंग्रेजी में लिखी एक पुस्तक में शूद्रों के बारे लिखी कुछ बातों का उल्लेख किया जिसको सदन के नेता जे पी नड्डा ने चुनौती दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता मनुस्मृति की मूल प्रति प्रस्तुत करें अन्यथा उनकी बात को सदन के रिकार्ड में न जाने दिया जाये। सभापति ने व्यवस्था दी कि श्री खरगे की वह टिप्पणी कार्यवाही में दर्ज नहीं होगी।

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