नयी दिल्ली , सितंबर 09 -- दिल्ली पुलिस ने सत्या निकेतन में छह सितंबर को ढही पांच मंजिला इमारत से संचालित 'हॉस्टल डेज' पेइंग गेस्ट (पीजी) सुविधा के संचालकों में से एक सुधांशु लवनीश को गिरफ्तार कर लिया है।

साउथ कैंपस इलाके में हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गयी थी और कई अन्य घायल हो गये थे।

साउथ कैंपस क्षेत्र में इमारत ढहने की परिस्थितियों की जांच में यह गिरफ्तारी नवीनतम घटनाक्रम है। पुलिस ने बताया कि सुधांशु को विस्तृत पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया है और जांच आगे बढ़ने के साथ आगे के विवरण साझा किये जायेंगे।

जांचकर्ताओं के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक 31 वर्षीय सुधांशु अपने बिजनेस पार्टनर शुभम त्यागी के साथ 2022 से सत्या निकेतन में पीजी आवास संचालित कर रहा था। पुलिस ने बताया कि यह जोड़ी फिलहाल इलाके में 'हॉस्टल डेज' के नाम से सात पीजी सुविधाओं का संचालन करती है।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि सुधांशु और त्यागी ने अगस्त 2025 में 1.05 लाख रुपये के मासिक किराये पर ढही हुई इमारत की चार मंजिलें लीज पर ली थीं।इमारत की जर्जर स्थिति के कारण इसे अपेक्षाकृत कम दर पर किराये पर दिया गया था। पुलिस ने कहा कि संपत्ति में चल रहे निर्माण और जीर्णोद्धार के काम से अवगत होने के बावजूद सुधांशु पीजी का संचालन जारी रखे हुए था।

जांच का ध्यान हादसे से ठीक पहले बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर कराये जा रहे जीर्णोद्धार कार्य पर भी केंद्रित है।

पुलिस ने बताया कि मजदूर ठेकेदार 35 वर्षीय सनोज कुमार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया और औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने से पहले पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया। पूछताछ के दौरान उसने जांचकर्ताओं को बताया कि महेश गुप्ता ने हादसे से लगभग 10 दिन पहले जीर्णोद्धार का काम कराने के लिए उसे काम पर रखा था।

पुलिस के मुताबिक, सनोज को 2,800 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा था और उसे बेसमेंट को ग्राउंड फ्लोर के समतल करने का काम सौंपा गया था। काम के दौरान निर्माण सामग्री का लगभग तीन ट्रक मलबा बेसमेंट में डाला गया था।

जांचकर्ताओं का यह भी आरोप है कि ग्राउंड फ्लोर की एक दीवार, जो दुकान के लिए तय की गयी जगह में रुकावट डाल रही थी, उसे हादसे के दिन हटा दिया गया था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस बदलाव ने इमारत की संरचनात्मक स्थिरता को नुकसान पहुंचाया और इमारत ढहने का कारण बना।

महेश गुप्ता, जिसकी दो दिन की पुलिस कस्टडी बुधवार को खत्म हो रही है, उसे भी साउथ कैंपस थाने से अदालत में पेशी के लिए ले जाया गया। काम में शामिल सनोज कुमार और एक राजमिस्त्री को भी अदालत में पेश किया गया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि महेश ने जांचकर्ताओं से कहा था कि वह अपने माता-पिता हरिराम और उर्मिला गुप्ता की ओर से संपत्ति की देखरेख के लिए जिम्मेदार है। उसने यह भी बताया कि मानसून के दौरान जमा कचरे और बारिश के पानी के कारण बेसमेंट में कई दिनों से मरम्मत का काम कराया जा रहा था। अतिरिक्त व्यावसायिक स्थान बनाने के लिए ग्राउंड फ्लोर पर भी काम कराया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, महेश और उसके परिवार के सदस्यों को स्थानीय निवासियों से इमारत ढहने की जानकारी मिली और इसके बाद वे राजस्थान के भिवाड़ी स्थित अपने ससुराल चले गये।

इससे पहले, मामले में संपत्ति के मालिकों 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता (भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट) और उनकी 75 वर्षीय पत्नी उर्मिला गुप्ता के साथ उनके 52 वर्षीय बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस कस्टडी दी गयी थी।

'हॉस्टल डेज' नाम से पीजी सुविधा के रूप में इस्तेमाल की जा रही यह इमारत छह सितंबर को सत्या निकेतन में ढह गयी थी, जिसके बाद दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, डीडीएमए, एमसीडी और अन्य आपातकालीन एजेंसियों ने लंबा बचाव अभियान चलाया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गयी, जबकि कई अन्य को बचाकर अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

इस हादसे ने दिल्ली में पीजी आवासों की सुरक्षा और नियमन की व्यापक समीक्षा को भी जन्म दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं और एमसीडी को पीजी आवासों का ऑडिट करने का निर्देश दिया है, जबकि दिल्ली सरकार ने लाइसेंसिंग, सुरक्षा ऑडिट और अन्य नियामक आवश्यकताओं को कवर करने वाली एक व्यापक पीजी नीति बनाने की घोषणा की है।

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