चंडीगढ़/ नयी दिल्ली , जुलाई 21 -- लोकसभा सांसद एवं पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दिल्ली में नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान सांसदों और कार्यकर्ताओं पर की गयी पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की।

मंगलवार को यहां जारी बयान में श्री रंधावा ने कहा कि कांग्रेस सांसद और कार्यकर्ता छात्रों के भविष्य तथा कथित परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर प्रधानमंत्री आवास की ओर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे, लेकिन उन्हें हिरासत में लिया गया और बल प्रयोग किया गया।

उन्होंने कहा, " हम छात्रों के खून का हिसाब मांगने प्रधानमंत्री के घर आये हैं। अगर सांसदों की यह हालत है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा। "श्री रंधावा ने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार पुलिस के जरिए विरोध की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों को हिरासत में लेना और उनके साथ बलपूर्वक व्यवहार करना निंदनीय और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को लाठियों के दम पर दबाने की हर कोशिश लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उनका आरोप था कि सरकार जवाबदेही से बचने के लिए दमनकारी रवैया अपना रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह केवल नीट परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के विश्वास और उनके भविष्य का सवाल है। जब परीक्षाओं की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं और छात्र न्याय की मांग करते हैं, तब सरकार का दायित्व जवाब देना होता है, न कि पुलिस बल का सहारा लेना।

श्री रंधावा ने कहा कि कांग्रेस छात्रों के मुद्दों को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से उठाती रहेगी और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस पूरे मामले पर जवाब देना होगा।

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