पंचकूला , जुलाई 30 -- केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-पानीपत-करनाल-यमुनानगर-पांवटा साहिब के लिए अलग आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग-44, राष्ट्रीय राजमार्ग-344 और राष्ट्रीय राजमार्ग-907 के माध्यम से उपलब्ध है, जो दिल्ली, पानीपत, करनाल, अंबाला, यमुनानगर और पांवटा साहिब जैसे प्रमुख औद्योगिक, कृषि एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ते हैं। यह जानकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बुधवार को राज्यसभा में दी।
मंत्रालय के अनुसार, बीते पांच वर्षों में हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्गों की 81 परियोजनाओं ने रफ्तार पकड़ी है। इनमें से 58 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 20 पर निर्माण कार्य जोरों पर है, जबकि तीन परियोजनाएं मंजूरी के बाद जल्द ही शुरू होने वाली हैं। इन परियोजनाओं में चौड़े होते राजमार्ग, नए बाईपास, रिंग रोड, रेलवे ओवरब्रिज, एक्सप्रेसवे, फ्लाईओवर और सड़क अवसंरचना के अन्य महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए धनराशि परियोजनावार नहीं बल्कि राज्यवार आवंटित की जाती है। हरियाणा के लिए वर्ष 2021-22 में 7,203 करोड़ रुपये, 2022-23 में 3,924 करोड़ रुपये, 2023-24 में 6,062 करोड़ रुपये, 2024-25 में 4,391 करोड़ रुपये तथा 2025-26 में 3,330 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 30 जून तक 1,119 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसी अवधि में क्रमशः 7,203 करोड़ रुपये, 3,924 करोड़ रुपये, 6,062 करोड़ रुपये, 4,344 करोड़ रुपये, 3,327 करोड़ रुपये तथा 1,057 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
मंत्रालय के अनुसार, जिन प्रमुख परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है उनमें द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का हरियाणा हिस्सा, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के विभिन्न पैकेज, करनाल-जींद, गोहाना-सोनीपत, रोहतक-जींद मार्ग, पिंजौर बाईपास, रेवाड़ी बाईपास, गुरुग्राम-सोहना मार्ग, सोनीपत-पानीपत आठ लेन परियोजना और इस्माइलाबाद-नारनौल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इस समय जिन प्रमुख परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, उनमें करनाल और अंबाला की रिंग रोड, शामली-अंबाला राष्ट्रीय राजमार्ग, जगाधरी-ताजेवाला मार्ग, गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी, भिवानी-हांसी मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर अतिरिक्त संरचनाओं व फुटओवर ब्रिजों का निर्माण शामिल है। कई परियोजनाओं में 80 से 95 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है, जिससे जल्द ही इनका लाभ जनता को मिलने लगेगा।
सरकार ने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों से समय-समय पर राज्य मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने अथवा उनके उन्नयन के प्रस्ताव प्राप्त होते हैं। ऐसे प्रस्तावों पर निर्णय यातायात घनत्व, क्षेत्रीय संपर्क की आवश्यकता, भूमि उपलब्धता, सामाजिक-आर्थिक महत्व और प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप लिया जाता है। इसी आधार पर नए राष्ट्रीय राजमार्ग, बाईपास, फ्लाईओवर और अन्य सड़क परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी जाती है। राज्यसभा में सरकार ने दोहराया कि दिल्ली-पानीपत-करनाल-यमुनानगर-पांवटा साहिब के लिए अलग आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है, क्योंकि इस पूरे मार्ग की कनेक्टिविटी मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के माध्यम से पहले से उपलब्ध है।
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