नयी दिल्ली , फरवरी 16 -- दिल्ली पुलिस ने एक नाबालिग लडकी की हत्या के मामले में 21 साल से फरार चल रहे दंपत्ति को बिहार के बांका जिले से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली है।
इन दोनों को 2006 में अदालत ने घोषित अपराधी (पीओ) घोषित किया था। इनकी पहचान सिकंदर और उसकी पत्नी मंजू के तौर पर की गयी है।
पुलिस के अनुसार, दोनों ने वर्ष 2004 में दिल्ली के नांगलोई इलाके में 14 वर्षीय किशोरी की हत्या की थी और तभी से फरार थे। अपराध शाखा की टीम ने 15 दिन तक बिहार में डेरा डालकर 10 फरवरी को उन्हें पकड़ लिया।
उप पुलिस आयुक्त विक्रम सिंह ने बताया कि 22 अप्रैल 2004 को शिवराम पार्क, नांगलोई स्थित घर में किशोरी की हत्या का मामला सामने आया था। उस समय लड़की घर पर अकेली थी। उसके माता-पिता बिहार गए हुए थे और भाई नोएडा में एक शादी में शामिल था। वह 23 अप्रैल 2004 की सुबह लगभग 4:30 बजे घर लौटा तो मकान बाहर से बंद मिला। शक होने पर वह पीछे से घर में दाखिल हुआ और बहन को बिस्तर पर मृत पाया। उसका गला कटा हुआ था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और नांगलोई थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी सिकंदर पीड़िता के पिता गणेश का करीबी सहयोगी था और उनके साथ वॉटरप्रूफिंग के काम में मजदूरी करता था। पुलिस के मुताबिक, सिकंदर ने पूछताछ में बताया कि उसे वर्षों से कम भुगतान किया जा रहा था और जमीन देने का वादा भी पूरा नहीं हुआ था। इसी आर्थिक विवाद से नाराज होकर उसने पत्नी के साथ मिलकर कथित रूप से किशोरी की हत्या कर दी और शहर छोड़कर फरार हो गया।
हत्या के बाद दंपति करीब 15 दिन गाजियाबाद में रुके, फिर बिहार के बरौनी चले गए, जहां लगभग एक साल रहे। इसके बाद वे कोलकाता चले गए और 2025 तक वहीं दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते रहे और लगातार ठिकाने बदलते रहे ताकि गिरफ्तारी से बच सकें।
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