नयी दिल्ली , जुलाई 21 -- दिल्ली सरकार ने विदेशी मेडिकल स्नातकों (एफएमजी) को बड़ी राहत देते हुए राजधानी के 12 अस्पतालों में 275 अभ्यर्थियों के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था सुनिश्चित की है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आज कहा कि दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र विदेशी मेडिकल स्नातक को अपनी इंटर्नशिप पूरी करने का निष्पक्ष अवसर मिले और वह स्वास्थ्य व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे सके। उन्होंने कहा कि 275 एफएमजी को समय पर इंटर्नशिप उपलब्ध कराकर यह सुनिश्चित किया गया है कि उनका प्रशिक्षण बिना किसी अनावश्यक देरी के पूरा हो। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक कुशल और प्रशिक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे दिल्लीवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

स्वास्थ्य विभाग ने काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन अभ्यर्थियों को विभिन्न टीचिंग और नॉन-टीचिंग अस्पतालों में सीटें आवंटित कर दी हैं। इस कदम से लंबे समय से इंटर्नशिप का इंतजार कर रहे विदेशी मेडिकल स्नातकों को समय पर प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा और वे मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

दिल्ली सरकार के अनुसार, कुल 275 सीटों में से 68 सीटें सात टीचिंग अस्पतालों में आवंटित की गयी हैं। इनमें ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अटल बिहारी वाजपेयी एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल, हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा एनडीएमसी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। वहीं, 207 सीटें पांच नॉन-टीचिंग अस्पतालों दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल (रघुबीर नगर), जयपुर गोल्डन अस्पताल, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और सेंट स्टीफंस अस्पताल में आवंटित की गयी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए टीचिंग और नॉन-टीचिंग अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित कर निष्पक्ष काउंसलिंग और सीट आवंटन सुनिश्चित किया गया। विभाग का कहना है कि यह पहल चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और राजधानी की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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