मुंबई , जुलाई 25 -- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के माता-पिता ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके बेटे का आंदोलन सफल रहा और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, लेकिन आंदोलन के दौरान उन्हें हर समय बेटे की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता बनी रही।

श्री प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिलने के बाद अभिजीत की मां ने संवाददाताओं से कहा, "मेरी आंखों में खुशी के आंसू हैं। मेरे बेटे की मेहनत सफल हुई। मुझे उस पर गर्व है।" उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीने से पूरा परिवार भारी मानसिक तनाव में था।

उन्होंने कहा, "अभिजीत रात में सो नहीं पाता था। उसके साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी परेशान थे। दिन-रात चल रहे आंदोलन और बढ़ते संघर्ष को लेकर हम सभी चिंता में थे। हमें रात में नींद नहीं आती थी। आज खुशी है कि मेरे बेटे की मेहनत रंग लायी। उसने जो रुख अपनाया और जिस तरह संघर्ष किया, उस पर मुझे गर्व है।"उन्होंने कहा, "कई बार मुझे डर लगता था, क्योंकि उसके साथ मारपीट हुई। उसे थप्पड़ मारे गये। किसी ने उस पर स्याही भी फेंकी। मैं लगातार यही सोचती रहती थी कि उसके साथ आगे क्या होगा। मैं रात तीन-चार बजे तक जागती रहती थी। न ठीक से खाना खा पाती थी और न ही नींद आती थी। सात जून से घर में किसी काम में मन नहीं लग रहा था।"उन्होंने कहा कि हर सुबह फोन उठाने में भी डर लगता था कि कहीं कोई बुरी खबर न मिल जाए। उन्होंने बताया कि वह अभिजीत के दोस्तों से उसके बारे में जानकारी लेती थीं और वे उन्हें भरोसा दिलाते थे कि सभी अभिजीत के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा, "अब वह जल्द से जल्द घर लौट आए। जब वह घर आएगा तो मैं उसे गले लगा लूंगी।"शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर उन्होंने कहा, "यह सभी छात्रों की जीत है। यह उन सभी लोगों की सफलता है जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस आंदोलन में भाग लिया।"इस बीच अभिजीत के परिवार ने कहा कि उन्हें उनके जीवन पर खतरे की आशंका थी और दिल्ली पुलिस पर उनका बिल्कुल भरोसा नहीं था। इसी आशंका के चलते अभिजीत की बहन स्नेहा वंजारे ने बीड जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर अभिजीत को विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की थी।

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