अलवर , अगस्त 01 -- राजस्थान के अलवर में दिगम्बर जैन संत मुनि अभिनंदन सागर महाराज का चातुर्मास सादगी, संयम और आध्यात्मिकता की अनूठी मिसाल बन गया है।

अलवर-जयपुर रोड स्थित ढाई पैड़ी के अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित इस चातुर्मास में न किसी प्रकार की सजावट की गई है, न टेंट लगाए गए हैं, न पोस्टर-बैनर लगाए गए हैं और न ही कलश स्थापना या पाद प्रक्षालन के लिए किसी प्रकार की बोली लगाई गई। इसके बावजूद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और प्रवचन सुनने के लिए पहुंच रहे हैं।

अहिंसा स्थल जैन मंदिर के प्रबंधक बच्चू सिंह जैन ने शनिवार को बताया कि मुनि अभिनंदन सागर महाराज ने स्वयं स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चातुर्मास को केवल धर्म साधना और आत्मकल्याण का माध्यम बनाया जाए, इसमें किसी भी प्रकार का दिखावा या आडंबर न हो। उनके निर्देशों के अनुसार पूरे आयोजन को अत्यंत सादगीपूर्ण रखा गया है।

मुनिश्री दिल्ली से विहार करते हुए अलवर पहुंचे हैं और अहिंसा स्थल में उनकी चातुर्मास कलश स्थापना संपन्न हुई। वह आचार्य विनीत सागर जी के शिष्य हैं और उनके दादागुरु आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज के सानिध्य में करीब 13 वर्ष पूर्व इसी मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न हुआ था।

जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह सवा आठ बजे मुनिश्री के प्रवचन, अपराह्न तीन बजे धर्म चर्चा और शाम छह बजे जिनवाणी वाचना का आयोजन होगा। इसके अलावा प्रतिदिन श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी उनके सानिध्य में संपन्न होंगे।

विशेष बात यह है कि श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले पाद प्रक्षालन के लिए भी किसी प्रकार की बोली नहीं रखी गई है, जिससे हर श्रद्धालु समान भाव से धर्म लाभ प्राप्त कर सके। यही कारण है कि अलवर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अहिंसा स्थल पहुंच रहे हैं और मुनिश्री के सादगीपूर्ण जीवन और आध्यात्मिक संदेश से प्रेरणा ले रहे हैं।

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