धार , जुलाई 30 -- मध्यप्रदेश के धार जिले की एक अदालत ने विवाहिता को दहेज के लिए प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में आरोपी पति को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अतिरिक्त शासकीय लोक अभियोजक शरद कुमार पुरोहित ने बताया कि प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश एवं द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश राहुल वर्मा की अदालत ने आरोपी अनिल निवासी विनायक विहार कॉलोनी, पीथमपुर को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) एवं 498-ए (क्रूरता) के तहत दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार मृतका छाया का विवाह 11 दिसंबर 2020 को अनिल के साथ हुआ था। विवाह के लगभग एक वर्ष बाद से आरोपी पति, सास, ससुर, जेठ और जेठानी कथित रूप से प्लॉट खरीदने के लिए तीन लाख रुपये दहेज की मांग करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर छाया को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर छाया ने 24 सितंबर 2022 को सल्फास की गोली खा ली, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अगले दिन पति ने उसके मायके पक्ष को जहर खाने की सूचना दी। प्रकरण की जांच थाना कोतवाली धार के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा की गई। परिजनों के बयान और जांच के आधार पर तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक तरुणेंद्र सिंह बघेल ने आरोपी पति अनिल, ससुर मांगीलाल, सास शांताबाई, जेठ सुनील और जेठानी सरिता के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ साक्षियों के बयान तथा 21 दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। न्यायालय ने मृतका के परिजनों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पति के विरुद्ध आरोप संदेह से परे सिद्ध मानते हुए उसे दोषी करार दिया। विचारण के दौरान सह-आरोपी सास शांताबाई की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध प्रकरण समाप्त कर दिया गया।
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