कोटा , अक्टूबर 17 -- राजस्थान के कोटा में राष्ट्रीय दशहरा मेला- 2026 के तहत 20 अक्टूबर को दशहरा मैदान में रावण दहन किया जाएगा।

इसके लिए 105 फुट ऊंचा दशानन का विशालकाय पुतला और इसके साथ 72-72 फुट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले दशहरा मैदान में स्थापित कर दिए गए हैं।

महापौर अनुसुइया गोस्वामी ने शनिवार को बताया कि निर्माण अनुभाग के अभियंताओं की देखरेख में शुक्रवार रात पुतलों को खड़ा करने का कार्य प्रारंभ हुआ। आज सुबह करीब सात बजे तीनों पुतलों को सुरक्षित रूप से मैदान में खड़ा कर दिया गया। इस पूरे कार्य में निर्माण अनुभाग के दल के साथ 45 मजदूर और अधिकारी रातभर डटे रहे। लोहे के मजबूत ढांचे के निर्माण के कारण पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार रावण का पुतला काफी आसानी और सुरक्षा के साथ खड़ा हो गया।

मेला अधिकारी ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि इस कार्य को अंजाम देने के लिए 100 टन की बड़ी क्रेन, एक हाइड्रा और 65 टन क्षमता वाली क्रेन का सहारा लिया गया। इसके लिए विशेष रूप से इंदौर से तीन भारी-भरकम क्रेन मंगवाई गई थीं। पुतले के निर्माण के लिए लोहे का एक विशेष एवं मजबूत ढांचा तैयार किया गया था। जिसकी बदौलत इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

उन्होंने बताया कि इस बार दशहरा मेले में दर्शकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण रावण की 3डी तकनीक और यांत्रिक गतिविधियां रहेंगी। दिल्ली-एनसीआर के कारीगर अनीस की देखरेख में तैयार किया गया यह पुतला दहन से पहले 360 डिग्री पर अपनी गर्दन घुमाएगा। आंखें झपकाएगा और मूँछें हिलाएगा। हाथ में थामी विशाल तलवार भी चलाएगा और भयानक अट्टहास करेगा।

रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को तैयार करने में पिछले करीब ढाई महीनों से 15 से 20 कारीगर लगातार परिश्रमकर रहे थे। इस निर्माण में आठ टन लोहा और 500 बांस की खपच्चियां, 1500 मीटर वेलवेट का कपड़ा और तीन क्विंटल रस्सी, जापानी कागज, रद्दी, गत्ते और अन्य विशेष सामग्री का उपयोग किया गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित