पटना , अक्टूबर 14 -- ांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव का समापन बुधवार को लोक संस्कृति, संगीत और नृत्य की मनोहारी छटा के बीच गरिमापूर्ण एवं भव्य तरीके से हुआ। पारंपरिक लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की जीवंतता और सुरीली गायकी ने महोत्सव की अंतिम संध्या को यादगार बना दिया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण सांस्कृतिक उल्लास और उत्सव की उमंग से सराबोर रहा।
कार्यक्रम में कलाकारों ने बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। 'आज मिथिला नगरिया निहाल सखियाँ' जैसे मधुर लोकगीत के साथ झिझिया, कृषि नृत्य और झूमर की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बिहार की सांस्कृतिक विरासत के विविध रंगों से रूबरू कराया। इन प्रस्तुतियों में मिथिलांचल एवं मगध की मिठास, लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और सामूहिक उल्लास की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।
वहीं, प्रसिद्ध गायिका भव्या पंडित ने अपनी सुरीली आवाज और मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गीतों ने संगीतमय वातावरण को और भी जीवंत बना दिया। डांडिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति ने उत्सव में उमंग, ऊर्जा और रंगों का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। संगीत और नृत्य की इस खूबसूरत जुगलबंदी ने दर्शकों को सांस्कृतिक आनंद से भर दिया।
जिलाधिकारी कुंदन कुमार एवं वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा के द्वारा कलाकारों एवं इस आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं अन्य सम्बंधित लोगों को सम्मानित किया गयादशहरा महोत्सव की इन प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की विविधता, लोक परंपराओं की जीवंतता और लोक संगीत के विविध रूपों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। लोकगीतों से लेकर आधुनिक मंचीय गायकी तक, महोत्सव ने कला और संस्कृति के विभिन्न आयामों को एक साझा मंच प्रदान किया।
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