पटना , अगस्त 18 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के फार्माकोलॉजी विभाग ने सोमवार को राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम में भारतीय फार्माकोलॉजी के जनक सर (कर्नल) रामनाथ चोपड़ा के योगदान को याद करते हुए आधुनिक चिकित्सा में फार्माकोलॉजी की बदलती भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने फार्माकोलॉजी के महत्व को रेखांकित किया। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की फार्माकोलॉजी विभाग की पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) इंदु सिन्हा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय फार्माकोलॉजी के विकास और सर रामनाथ चोपड़ा की विरासत को याद करने के साथ हुई। प्रो. (डॉ.) हरिहर दीक्षित ने "सर (कर्नल) रामनाथ चोपड़ा का जीवन और योगदान- भारतीय फार्माकोलॉजी के जनक" विषय पर व्याख्यान देते हुए उनके दूरदर्शी कार्यों और भारतीय फार्माकोलॉजी की नींव मजबूत करने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

वैज्ञानिक सत्र में प्रो. (डॉ.) एन. आर. बिस्वास ने "क्लिनिकल केयर में प्रिसीजन मेडिसिन" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तेजी से ऐसे उपचार की ओर बढ़ रही है जिसमें मरीज की व्यक्तिगत जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उपचार का चयन किया जाता है। इसमें दवाओं और उनके प्रभाव को समझने वाली फार्माकोलॉजी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं प्रो. (डॉ.) रानी इंदिरा सिन्हा ने "फार्माकोलॉजिस्ट: आगे की राह" विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बदलते चिकित्सा परिदृश्य में फार्माकोलॉजिस्ट की भूमिका शिक्षा और शोध से आगे बढ़कर सुरक्षित दवा उपयोग, क्लिनिकल निर्णय और मरीज केंद्रित उपचार तक पहुंच रही है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रमोद कुमार मांझी, अपर आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स पटना के नेतृत्व में किया गया। वैज्ञानिक व्याख्यानों के बाद इंटरैक्टिव चर्चा आयोजित की गई जिसमें प्रतिभागियों ने फार्माकोलॉजी के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों, नई संभावनाओं और भविष्य की भूमिका पर विचार साझा किए।

राष्ट्रीय फार्माकोलॉजी दिवस 2026 ने यह संदेश दिया कि आधुनिक चिकित्सा में बेहतर उपचार की नींव केवल नई दवाओं की खोज नहीं, बल्कि उनका सही, सुरक्षित और वैज्ञानिक उपयोग भी है। प्रिसीजन मेडिसिन से लेकर मरीजों की सुरक्षा तक, फार्माकोलॉजी आज चिकित्सा विज्ञान के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

एम्स पटना का यह आयोजन फार्माकोलॉजी में शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज केंद्रित क्लिनिकल सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

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