जयपुर , अगस्त 04 -- राजस्थान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को बताया कि राज्य में आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित औषधियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से औषधि नियंत्रण संगठन द्वारा दवाओं की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा रही है और गत जुलाई में 587 दवा नमूनों की जांच की गई हैं।
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि औषधि परीक्षण प्रयोगशाला ने जुलाई में कुल 587 दवा नमूनों का परीक्षण किया। इनमें से 579 नमूने (98.64 प्रतिशत) निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि आठ नमूने (1.36 प्रतिशत) अमानक पाए गए।
उन्होंने बताया कि एनएसक्यू पाए गए नमूनों में सेफिक्सिम विद लैक्टिक एसिड बैसिलस टैबलेट्स, निफेडिपिन सस्टेन्ड रिलीज टैबलेट्स, फॉर्मल्डिहाइड सॉल्यूशन, बेटामेथासोन सोडियम फॉस्फेट इंजेक्शन, मेट्रोनिडाजोल टैबलेट्स, सेफिक्सिम एवं ओफ्लॉक्सासिन डिस्पर्सिबल टैबलेट्स, टैपेंटाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट तथा लेवोसेटिरिजिन डाइहाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स शामिल हैं। ये नमूने विभिन्न राज्यों के औषधि निर्माताओं से संबंधित हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त डॉ.टी.शुभमंगला ने बताया कि अमानक घोषित किए गए नमूनों के संबंध में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। संबंधित औषधि नियंत्रक अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से बाजार से दवा नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाती है। गुणवत्ता मानकों से समझौता करने वाले निर्माताओं एवं संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है, ताकि आमजन को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराई जा सकें।
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