पटना , अक्टूबर 25 -- कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर दलितों के साथ भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि आजादी के आठ दशक बाद भी देश में छुआछूत कायम है और जब तक देश की बड़ी आबादी को समानता और अपनत्व का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक राष्ट्रीय एकता का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।

पटना के बापू सभागार में बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए श्री खड़गे ने कहा कि भाजपा और आरएसएस छुआछूत के समर्थक हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दलितों की स्थिति में सुधार नहीं चाहते। उन्होंने अपने हल्द्वानी दौरे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आठ अगस्त 2026 को वहां रामलीला मैदान में उनकी जनसभा के बाद भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने उस मंच का हवन कर शुद्धीकरण कराया था, जहां उनका कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में संसद में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खेद जताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई। श्री खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संविधान की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन छुआछूत की भावना रखने वालों को संरक्षण देते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह आधुनिक बिहार में लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत करने वाले नायकों में थे। उन्होंने जमींदारी उन्मूलन कराकर और कमजोर तबकों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सामाजिक न्याय का नया अध्याय शुरू किया। खेती-बाड़ी, उद्योग, शिक्षा, सिंचाई और संस्थाओं के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1937 में श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में बिहार में कांग्रेस की पहली सरकार बनी थी और 1946 में दूसरी सरकार बनी। उस समय अंग्रेजी शासन था और मुख्यमंत्री को प्रीमियर कहा जाता था। संविधान के तहत 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव के बाद से इकत्तीस जनवरी 1961 तक श्री बाबू बिहार के मुख्यमंत्री रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित