दरभंगा , मार्च 26 -- उत्तर बिहार के प्रमुख शहर दरभंगा में तालाबों पर बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण और प्रदूषण के गंभीर मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण , पूर्वी आंचलिक पीठ, कोलकाता ने "तालाब बचाओ अभियान, दरभंगा बनाम बिहार सरकार" मामले में सुनवाई करते हुए न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जताई है, बल्कि अगली तिथि पर दरभंगा के जिलाधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य कर दी है।

तालाब बचाओ अभियान के अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्रा और सुश्री रेणु ने बताया कि मामले की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय हरित अधिकरण को तालाब बचाओ अभियान, दरभंगा की ओर से दिए गए मूल आवेदन संख्या 14/2025 ईजेड के 27 जनवरी 2025 के आदेश से जुड़ा है, जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ, कोलकाता ने मोन/मोइन पोखर से संबंधित अतिक्रमण और प्रदूषण के आरोपों को गंभीर मानते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था।

याचिका में बताया गया है कि करीब 100 एकड़ में फैला यह प्राकृतिक जलस्रोत, जो बागमती नदी से जुड़ा है, पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अतिक्रमण का शिकार हुआ है।

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