पलक्कड़ (केरल) , जुलाई 25 -- दक्षिण रेलवे ने ट्रेन संचालन की सुरक्षा, दक्षता और डिजिटलीकरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तीन स्वदेशी डिजिटल एप्लिकेशन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन सिग्नल रजिस्टर (ई-टीएसआर), रेलवे ब्लॉक मैनेजमेंट सिस्टम (आरबीएमएस) और डिलीवरिंग ऑक्यूपेशनल सेफ्टी ऑन ट्रैक (दोस्त) लॉन्च किये हैं।

दक्षिण रेलवे की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इन-हाउस परिकल्पित और विकसित ये तीनों समाधान दैनिक रेलवे संचालन के सबसे सुरक्षा-संवेदनशील कार्यों को डिजिटल बनाते हैं, जिनमें ट्रेन सिग्नल से जुड़ी घटनाओं की रिकॉर्डिंग, इंजीनियरिंग ब्लॉक की मंजूरी व प्रबंधन और चालू पटरियों पर या उनके पास काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा शामिल है।

ये पहल दक्षिण रेलवे के कागजी कामकाज की पुरानी व्यवस्था से निकलकर कनेक्टेड और वास्तविक समय (रियल-टाइम) पर आधारित डिजिटल परिचालन प्रणाली की ओर बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक आरएन सिंह ने कहा कि रेलवे में तकनीक का अंतिम उद्देश्य प्रणाली को चलाने वाले कर्मचारियों को सहूलियत देना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन एप्लिकेशनों को स्टेशन मास्टर, नियंत्रक, सेक्शन इंजीनियर और ट्रैकमेन सहित क्षेत्रीय कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि काम की थकान कम की जा सके, होने वाली गलतियों को टाला जा सके और सबसे बढ़कर लोगों की जान बचायी जा सके।

'ई-टीएसआर' स्टेशनों पर बनाये रखे जाने वाले पारंपरिक कागजी ट्रेन सिग्नल रजिस्टर की जगह एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर ले लेता है। ट्रेन की आवाजाही से जुड़ी जानकारी सीधे डेटा लॉगर से दर्ज होती है, जबकि समय अपने आप दर्ज हो जाता है, जिससे मानवीय गलतियों में भारी कमी आती है और समय एवं कागज दोनों की बचत होती है। यह एप्लिकेशन पारंपरिक ट्रेन सिग्नल रजिस्टर को डिजिटल बनाता है और स्वचालित टाइम-स्टैम्प कैप्चर के साथ डेटा लॉगर डेटा का उपयोग कर ट्रेन की आवाजाही की प्रविष्टियां तैयार करता है। यह रिमार्क्स कॉलम में संबंधित प्रविष्टियों के साथ लाल स्याही की प्रविष्टियों के साथ-साथ किसी भी तकनीकी खराबी या आपात स्थिति में मैनुअल प्रविष्टि की सुविधा भी प्रदान करता है।

'आरबीएमएस' एप्लिकेशन रेलवे ब्लॉक के शुरुआती अनुरोध से लेकर अंतिम समापन तक के पूरे प्रबंधन के लिए एक संपूर्ण, पेपरलेस डिजिटल समाधान प्रदान करता है। इसका रियल-टाइम वर्कफ्लो लाइन, पावर और एसएंडटी (सिग्नल एवं दूरसंचार) ब्लॉक के अनुरोध, स्वीकृति, उपयोग, विस्तार और रद्दीकरण के साथ-साथ एल्गोरिदम-आधारित ब्लॉक योजना को कवर करता है। यह एप्लिकेशन पूरे ब्लॉक प्रबंधन प्रक्रिया को डिजिटल और स्वचालित बनाता है। इसमें पद-विशिष्ट डैशबोर्ड, भूमिका के आधार पर पहुंच और ओटीपी प्रमाणीकरण जैसी विशेषताएं हैं, साथ ही यह प्रदर्शन संकेतकों के साथ एमआईएस रिपोर्ट भी प्रदान करता है।

इस प्रणाली में लोकेशन और जियो-फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं और यह एक से अधिक स्टेशन मास्टरों के एक साथ लॉगिन को रोकती है। यह ब्लॉक के समय में बदलाव की सुविधा देती है, पूरे हो चुके ब्लॉक का डेटा सुरक्षित रखती है और यह 'ई-टीएसआर' एप्लिकेशन के साथ जुड़ी हुई है।

पहले चरण में शुरू किया गया 'दोस्त' ऐप रेलवे कर्मियों के सामने आने वाली सबसे गंभीर सुरक्षा चिंताओं में से एक-चालू पटरियों पर या उनके पास काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा का समाधान करता है। यह सिस्टम सिग्नलिंग नेटवर्क से ट्रेन की आवाजाही की लाइव जानकारी को कर्मचारियों की जीपीएस लोकेशन से मिलाता है और आने वाली ट्रेनों के प्रति उन्हें आगाह करने के लिए पहले ही चेतावनी अलर्ट जारी करता है। यह ऐप लोकेशन के आधार पर सुरक्षा देते हुए रियल-टाइम में येलो और रेड श्रेणी के अलर्ट प्रदान करता है। यह पटरियों के आसपास के शोर-शराबे वाले माहौल में भी चेतावनी देने के लिए आवाज, स्क्रीन अलर्ट, फ्लैशलाइट और कंपन का उपयोग करता है। मैदानी कर्मचारियों के लिए सिस्टम का उपयोग आसान बनाने के लिए इसमें बहुभाषी वॉयस अलर्ट भी शामिल किये गये हैं।

'दोस्त' ऐप दुर्घटना की सूचना देने और आपातकालीन एसओएस सुविधा के साथ-साथ ट्रेन फीडबैक और निरंतर कनेक्टिविटी निगरानी भी प्रदान करता है। इन तीनों पहलों से रेलवे कर्मचारियों और ट्रेन संचालन की सुरक्षा बढ़ने, मानवीय हस्तक्षेप कम होने, त्वरित निर्णय लेने में सुधार होने, ब्लॉक प्रबंधन में दक्षता आने और अधिक सुरक्षित, स्मार्ट एवं डिजिटल रेलवे की ओर बदलाव की गति तेज होने की उम्मीद है। इन एप्लिकेशनों से दक्षिण रेलवे के पर्यवेक्षकों, नियंत्रकों, स्टेशन मास्टरों के साथ-साथ इंजीनियरिंग, सिग्नलिंग एवं दूरसंचार और ट्रैक रख-रखाव में लगे कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।

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