हैदराबाद , अप्रैल 05 -- दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 487 रूट किलोमीटर में 'कवच' के क्षेत्र परीक्षण किया है, जो रेलवे बोर्ड के 402 रूट किलोमीटर के लक्ष्य से कहीं ज़्यादा है।

एससीआर ने रविवार को बताया कि सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने की अपनी विशेष मुहिम के तहत एससीआर ने अपने पूरे नेटवर्क में 'कवच 4.0' लगाने का काम शुरू किया है। इस उपलब्धि का श्रेय ज़ोन की बारीकी से की गई योजना और प्रभावी कार्यान्वयन को जाता है। एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर एससीआर ने इसी अवधि के दौरान 479 रूट किलोमीटर में 'स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग' (एबीएस) चालू की, जो 357 रूट किलोमीटर के लक्ष्य से कहीं ज़्यादा है।

यह प्रणाली काजीपेट-बल्हारशाह, विजयवाड़ा-दुव्वाडा और वाडी-रेनिगुंटा जैसे प्रमुख खंडों में शुरू की गयी है। 'कवच' के क्षेत्र परीक्षण कई खंडों में किए गये, जिनमें काजीपेट-पेड्डमपेट (101 किमी), मलकाजगिरी-कामारेड्डी (106 किमी), चारलापल्ली-रघुनाथपल्ली (79 किमी), गुंटकल-रायचूर (120 किमी) और मुदखेड़-परभणी (81 किमी) शामिल हैं। इन खंडों में 'लोको कवच' के परीक्षण भी किए गये।

स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग एक ऐसी प्रणाली है जो स्वचालित स्टॉप सिग्नल के ज़रिए ट्रेनों की आवाजाही को नियंत्रित करती है। इसे सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे सुरक्षित दूरी पर चल सकें, जिससे पीछे से टक्कर होने का खतरा कम हो जाता है। यह लाइन की क्षमता को भी बेहतर बनाती है, परिचालन दक्षता को अनुकूलित करती है, और ट्रेनों की औसत गति बढ़ाने में मदद करती है।

एससीआर नेटवर्क के ज़्यादा भीड़भाड़ वाले और ग्रैंड ट्रंक मार्गों पर इस प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने इन उपलब्धियों को हासिल करने में क्षेत्रीय और मंडल दोनों स्तरों पर सिग्नल और दूरसंचार टीमों के असाधारण प्रयासों की सराहना की। एससीआर की ओर से रविवार को जारी एक बयान में बताया गया कि रेलवे सुरक्षा को और मज़बूत करने के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में 'कवच' और एबीसी दोनों को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती रहेगी।

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