नयी दिल्ली , अगस्त 20 -- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में गुरुवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए दक्षिणी राज्यों के लंबित जल विवादों को जल्द सुलझाने पर जोर दिया।

श्री शाह ने जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतर राज्य परिषद को संबंधित राज्यों के साथ संयुक्त बैठक कर इन मुद्दों का शीघ्र समाधान निकालने पर बल दिया। दक्षिणी राज्यों ने भी लंबित जल विवादों को आपसी संवाद और सकारात्मक तरीके से जल्द सुलझाने के सुझाव पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की प्रगति पानी पर निर्भर है और कृषि, उद्योग, स्वस्थ नागरिक तथा पर्यावरण इन चारों क्षेत्रों में पानी इस क्षेत्र की आत्मा है। उन्होंने जोर दिया कि राज्यों द्वारा अपने हितों की रक्षा करना गलत नहीं है, लेकिन यदि हितों की रक्षा के नाम पर पानी का मामला वर्षों तक विवादित रहे और नदी में बहता रहे इससे किसी का हित सुरक्षित नहीं होता। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक महानदियों को जोड़ने से भारत में अगले 100 वर्षों तक पानी की कमी नहीं हो सकती। इससे कई जलमार्ग भी बन सकते हैं, जो ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण सुधार और सस्ते परिवहन की व्यवस्था में मदद करेंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय परिषदों को 2014 से सार्थक मंच बनाया गया है। वर्ष 2014 से अब तक क्षेत्रीय परिषदों की 70 बैठकें हुई हैं, जिनमें 1,869 मुद्दों में से 1,445 यानी करीब 80 प्रतिशत का समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर भी नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच परिसंपत्तियों एवं देनदारियों के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर दोनों राज्यों ने गृह मंत्रालय के परामर्श से समाधान निकालने पर सहमति जताई।

बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन, पुड्डुचेरी के उप राज्यपाल के. कैलाशनाथन, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के उप राज्यपाल डी के जोशी, लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू शामिल हुए। राज्य सरकारों के मुख्य सचिव, सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल थे।

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