दंतेवाड़ा , जून 15 -- छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के मलगिर क्षेत्र स्थित बड़ेपल्ली, लावा और बैंगपाल गांवों में स्वतंत्रता के बाद पहली बार औपचारिक शिक्षा की शुरुआत होने जा रही है। इस पहल के तहत इन तीनों गांवों के 65 बच्चों का नामांकन कर उन्हें विद्यालयी शिक्षा से जोड़ा जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ये गांव लंबे समय से सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं, जिसके कारण यहां के बच्चे अब तक स्कूल नहीं पहुंच सके थे। शिक्षा विभाग ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान विशेष अभियान चलाकर दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में पैदल पहुंचकर सर्वेक्षण किया। इस दौरान घर-घर जाकर स्कूली आयु वर्ग के बच्चों की पहचान की गई तथा उनके आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए।

अभियान के तहत अधिकारियों और शिक्षकों ने ग्रामीणों एवं अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रारंभिक चरण में ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए भवनों में कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। साथ ही भविष्य में स्थायी विद्यालय भवनों के निर्माण की योजना भी तैयार की जा रही है।

शिक्षा विभाग समानांतर रूप से स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा में लाने के लिए भी विशेष प्रयास कर रहा है। पलायन, सामाजिक परिस्थितियों और अन्य कारणों से पढ़ाई से दूर हुए बच्चों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जा रही है, ताकि उन्हें फिर से शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा सके।

शिक्षा विभाग के इस प्रयास को बस्तर के दूरस्थ और पिछड़े इलाकों में शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही बड़ेपल्ली, लावा और बैंगपाल जैसे गांवों में पहली बार बच्चों के हाथों में किताबें और कलम दिखाई देंगी तथा शिक्षा का नया अध्याय शुरू होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित