नयी दिल्ली , जून 15 -- थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर यानी थोक महंगाई मई में बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गयी। अप्रैल में यह 8.26 प्रतिशत पर रही थी।

ये आंकड़े नयी सीरीज के आधार पर जारी किये गये हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अब थोक महंगाई की गणना के लिए आधार वर्ष 2022-23 कर दिया गया है और उसके आधार पर पहली बार आंकड़े जारी किये गये हैं।

थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस के दाम में तेज बढ़ोतरी है। इस उपवर्ग में थोक महंगाई दर 61.51 प्रतिशत रही। खनिज तेल की मुद्रास्फीति 49.82 प्रतिशत दर्ज की गयी। वहीं, कोयला और लिगनाइट एक साल में 2.26 प्रतिशत और बिजली 1.85 प्रतिशत सस्ती हुई है। कुल मिलाकर ईंधन एवं ऊर्जा वर्ग की थोक महंगाई दर 30.33 प्रतिशत रही।

विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत और प्राथमिक वस्तुओं के वर्ग की 4.99 प्रतिशत रही। प्राथमिक वस्तुओं में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 3.60 फीसदी, अखाद्य पदार्थों की 9.49 फीसदी और खनिजों की 4.91 फीसदी दर्ज की गयी।

विनिर्मित वस्तुओं में तंबाकू उत्पादों के दाम में सालाना 13.59 प्रतिशत, रसायन और रासायनिक उत्पादों में 13.40 प्रतिशत, बुनियादी धातुओं में 12.30 प्रतिशत, बिजली के उपकरणों में 11.32 प्रतिशत, विनिर्मित कपड़ों में 10.22 प्रतिशत और रबड़ तथा प्लास्टिक के उत्पादों में 9.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी।

नयी सीरीज में 697 की जगह अब 957 वस्तुओं को शामिल किया गया है। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को भी जगह मिली है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को अब प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन एवं बिजली वर्ग में शामिल किया गया है। इसमें अलग-अलग वस्तुओं को दिये जाने वाले भारांश में भी बदलाव किया गया है।

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