नयी दिल्ली , जुलाई 14 -- थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर जून में बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गयी।

पिछले साल दिसंबर में शून्य से ऊपर आने के बाद थोक महंगाई दर लगातार बढ़ी है। साथ ही थोक महंगाई के आंकड़ों की नयी सीरीज में पिछले साल जनवरी के बाद यह 16 महीने का उच्चतम स्तर भी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल मई में थोक मुद्रास्फीति 9.68 प्रतिशत और पिछले साल जून में शून्य से 0.4 प्रतिशत नीचे रही थी।

थोक महंगाई बढ़ाने में मुख्य योगदान विनिर्माण और ईंधन एवं बिजली वर्ग के उत्पादों का रहा है। विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत रही। इस वर्ग में पिछले साल जून के मुकाबले तंबाकू उत्पाद 14.14 प्रतिशत, विनिर्मित रसायन एवं रासायनिक उत्पाद 12.78 प्रतिशत, बुनियादी धातु 12.31 प्रतिशत, बिजली के उपकरण 11.03 प्रतिशत और टेक्सटाइल 10.85 प्रतिशत महंगा हुआ है।

बिजली एवं ऊर्जा वर्ग की महंगाई दर 27.41 फीसदी रही। इसमें खनिज तेल सालाना आधार पर 46.48 प्रतिशत और कच्चा तेल एवं प्राकृतिक गैस 34.75 प्रतिशत महंगी हुई। वहीं, बिजली 0.76 प्रतिशत और कोयला एवं लिग्नाइट 1.57 प्रतिशत सस्ता हुआ।

प्राथमिक उत्पादों के वर्ग में थोक महंगाई सात प्रतिशत रही। इसमें गैर-खाद्य उत्पादों के दाम जून 2025 की तुलना में 11.07 प्रतिशत और खनिजों के 9.45 प्रतिशत बढ़े। खाद्य उत्पादों में 5.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में थोक महंगाई दर 9.37 प्रतिशत रही है। इसमें ईंधन एवं ऊर्जा वर्ग की महंगाई दर 27.51 प्रतिशत और विनिर्मित उत्पादों की 7.18 प्रतिशत दर्ज की गयी है। प्राथमिक उत्पादों की थोक महंगाई 5.35 प्रतिशत दर्ज की गयी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित