धलाई (त्रिपुरा) , जनवरी 22 -- त्रिपुरा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी दल 'टिपरा मोथा' के संस्थापक प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने राज्य में 'टिपरासा (आदिवासी) शासन' की अपनी मांग को दोहराया है।

अप्रैल में होने वाले 'त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद' के चुनावों के मद्देनजर आयोजित इस बैठक में श्री देबबर्मा ने बुधवार को एक जनसभा में स्थानीय समुदायों की एकजुटता पर बल दिया। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय समूहों के विभाजनों ने ही उनकी राजनीतिक शक्ति और जनजातीय क्षेत्रों के विकास को कमजोर किया है। उन्होंने सभी समुदायों से अपने सामूहिक अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए जातीय मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की।

देहरादून में हाल ही में हुई एक युवक एंजल चकमा की हत्या के मामले का जिक्र करते हुए श्री देबबर्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों को उनके रंग रूप के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है, चाहे उनकी व्यक्तिगत जातीय पहचान कुछ भी हो। उन्होंने परिषद क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक निवेश की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्रीय कोष के आवंटन के बावजूद अधिकांश विकास केवल अगरतला और उसके आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित है, जबकि जनजातीय क्षेत्र आज भी पिछड़े हुए हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक गैस, बांस और रबर जैसे संसाधनों के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों को उनका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। श्री देबबर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, आजीविका और सामाजिक न्याय जैसे दीर्घकालिक मुद्दों पर केंद्रित है।

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