अगरतला , अगस्त 27 -- त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा-टिपरा मोथा गठबंधन के बीच एक बार फिर अटकलें तेज हो गयी हैं। टिपरा मोथा के वन मंत्री अनिमेष देबबर्मा और विधायक चित्ता देबबर्मा ने बुधवार को पार्टी नेता प्रद्योत किशोर देबबर्मन की ओर से आयोजित बैठक और डिनर में शामिल होने के बजाय मुख्यमंत्री डॉ माणिक साहा के साथ बैठक और डिनर में हिस्सा लिया।
डॉ साहा ने अपने सरकारी आवास पर गठबंधन के सभी विधायकों के साथ बैठक की थी, जिसमें भाजपा, टिपरा मोथा और आईपीएफटी के विधायक शामिल हुए। बैठक में विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के सवालों और मुद्दों से निपटने की रणनीति पर चर्चा की गयी। मानसून सत्र बुधवार से शुरू हुआ है।
इसी दौरान श्री देबबर्मन ने भी अपनी पार्टी के विधायकों की अलग बैठक एक अन्य स्थान पर बुलायी थी। इसके चलते पार्टी के लगभग सभी विधायक मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल नहीं हुए। श्री देबबर्मा और सुश्री चित्ता देबबर्मा ने प्रद्योत की बैठक में जाने के बजाय मुख्यमंत्री के साथ बैठक में हिस्सा लिया। दोनों का यह रुख गठबंधन के भीतर समीकरणों को लेकर नयी चर्चा का कारण बना है।
टिपरा मोथा प्रमुख श्री किशोर पहले ही टिपरासा (आदिवासी) समझौते में हुई प्रगति को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के प्रति असंतोष जता चुके हैं। यह समझौता पिछले लोकसभा चुनाव से पहले टिपरा मोथा, केंद्रीय गृह मंत्रालय और त्रिपुरा सरकार के बीच हुआ था।
मौजूदा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब गांव समितियों के चुनाव नजदीक हैं। श्री देबबर्मन स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उनकी पार्टी की मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जाता, टिपरा मोथा चुनाव में भाजपा के साथ सहयोग नहीं करेगी।
हाल में हुए टीटीएएडीसी चुनावों में टिपरा मोथा ने 24 सीटें जीतकर परिषद में अपना प्रशासन बनाया, जिससे आगामी स्थानीय चुनावों से पहले पार्टी की राजनीतिक स्थिति और मोलभाव की क्षमता मजबूत हुई है।
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