मिदनापुर , अक्टूबर 29 -- पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में स्थित आईआईटी खड़गपुर ने त्रिपुरा सरकार के साथ मिलकर राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने की पहल की है।

इस पहल के मुख्य केंद्र में उन्नत शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र (सीएएलआरआई) की स्थापना, एआई-आधारित शिक्षण और उद्योग से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं। गुरुवार को आईआईटी खड़गपुर और त्रिपुरा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के बीच एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें विश्वविद्यालयों और सरकारी डिग्री कॉलेजों को मजबूत करने, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर बेहतर बनाने के लिए पांच साल का रोडमैप तैयार किया गया है। इस साझेदारी का उद्देश्य देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक आईआईटी खड़गपुर की तकनीकी विशेषज्ञता और अनुसंधान क्षमताओं को पूर्वोत्तर राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली तक पहुंचाना है।

प्रस्तावित सीएएलआरआई इस साझेदारी का मुख्य केंद्र होगा, जहां आईआईटी खड़गपुर शैक्षणिक मार्गदर्शन और तकनीकी परामर्श प्रदान करेगा। यह केंद्र त्रिपुरा की विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बहु-विषयक अनुसंधान, नयी तकनीकों, डिजिटल शिक्षा, नवाचार और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा देगा। इस समझौते में त्रिपुरा टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए भी एक व्यवस्थित मार्गदर्शन योजना शामिल है, जिसमें पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण, फैकल्टी (शिक्षकों) का विकास, प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे में सुधार, अनुसंधान क्षमता बढ़ाना, मान्यता प्राप्त करना और संस्थागत प्रशासन को बेहतर बनाना शामिल है।

राज्यभर के सरकारी डिग्री कॉलेजों को व्यावसायिक शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण, उद्योग-अनुकूल कौशल कार्यक्रमों और उद्यमिता संबंधी पहलों से लाभ मिलने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक योग्यताओं और रोजगार के अवसरों के बीच की खाई को पाटना है। इसके साथ ही युवाओं को पारंपरिक नौकरी खोजने की मानसिकता से आगे बढ़कर स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक योग्यताओं और रोजगार के अवसरों के बीच की खाई को पाटना है। इसके साथ ही युवाओं को पारंपरिक नौकरी खोजने की मानसिकता से आगे बढ़कर स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि इसका उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता, उन्नत अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के लाभों को संस्थान की सीमाओं से बाहर तक पहुंचाना है। उन्होंने शिक्षा को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जोड़ने और एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने पर जोर दिया, जिसमें युवा खुद 'नौकरी देने वाले' (जॉब क्रिएटर्स) बन सकें।

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