अगरतला , अगस्त 26 -- त्रिपुरा मानवाधिकार आयोग (टीएचआरसी) ने बुधवार को उत्तरी त्रिपुरा के ज़िला मजिस्ट्रेट से उस व्यक्ति के विधवा की ज़मीन की स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है जिसका 2020 में एनएलएफटी उग्रवादियों ने कथित तौर पर अपहरण कर हत्या कर दी थी।

न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की अध्यक्षता वाले आयोग ने दिवंगत लिटन देबनाथ की विधवा शिप्रा देबनाथ को हो रही परेशानियों को उजागर करने वाली मीडिया रिपोर्टों के बाद इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया।

आयोग के आदेश में दी गई रिपोर्ट के अनुसार लिटन देबनाथ का 26 नवंबर, 2020 को बंदूक की नोक पर अपहरण कर लिया गया था। उनचास दिन बाद उनके शव के अवशेष मिले थे। बताया जाता है कि वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जिसमें उनकी पत्नी और चार बेटियां शामिल थीं।

आयोग ने उत्तरी त्रिपुरा ज़िला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक दोनों से रिपोर्ट मांगी है। ज़िला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट तो मिल गयी है, लेकिन पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट अभी भी लंबित है।

ज़िला प्रशासन ने बताया कि देबनाथ अपने चार बच्चों के साथ डमचेरा बाज़ार में किराए के मकान में रह रही थी। प्रशासन ने बताया कि डमचेरा मौजा के तहत भूखंड नंबर 282 के आवंटन के लिए उनका आवेदन मई 2021 में जमा किया गया था, लेकिन ज़मीन आवंटन समिति ने गांव की सड़क के पास होने के कारण उस भूखंड को मंज़ूरी नहीं दी और इसके बजाय एक वैकल्पिक भूखंड का सुझाव दिया गया था। प्रशासन ने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड इस दावे की पुष्टि नहीं करते हैं कि 2025 में देबनाथ को 0.06 एकड़ ज़मीन आवंटित की गई थी और बाद में उस पर कब्ज़ा कर लिया गया था। आयोग ने हालांकि कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि देबनाथ और उनके बच्चों को उस भूखंड से बेदखल किया गया था या नहीं। आयोग ने जिलाधिकारी को इस मामले पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है और आगे कोई भी कार्रवाई करने से पहले देबनाथ का पक्ष सुनने का निर्णय लिया है।

मामले की सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

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